IIT Delhi ने छात्रों के हित में लिए 5 बड़े फैसले, PC-IIT Delhi Web
IIT Delhi Student Welfare Reforms: देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) को इन दिनों भारी बवाल का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल छात्र ऋषिकेश की दुखद मौत के बाद कैंपस में लगातार विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं. इस बीच आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने खुद चिंता जाहिर करते हुए बड़े रिफॉर्म की बात कही है. बता दें कि संस्थान ने अपने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कई बड़े और ऐतिहासिक बदलाव लागू किए हैं.
संस्थान का स्पष्ट मानना है कि एक ऐसा अनुकूल और सुरक्षित वातावरण तैयार करना बेहद जरूरी है, जहां हर छात्र अपनी बात निडर होकर रख सके. कैंपस में छात्रों के तनाव को कम करने, शैक्षणिक बोझ घटाने और शिकायतों के पारदर्शी निपटारे के लिए प्रशासन ने जमीनी स्तर पर बड़े सुधारात्मक कदम उठाए हैं. आईए विस्तार से जानते हैं इन रिफॉर्म के बारे में….
विद्यार्थियों पर से पढ़ाई और ग्रेड्स का अनचाहा दबाव हटाने के लिए आईआईटी दिल्ली ने शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से बी.टेक उपाधि के लिए न्यूनतम सी.जी.पी.ए. (CGPA) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है. इसके अलावा वर्ष 2025 में लागू नए पाठ्यक्रम के तहत फर्स्ट ईयर के क्रेडिट लोड को कम किया गया है, सप्ताहांत (वीकेंड) में होने वाली परीक्षाओं पर ब्रेक लगाया गया है और प्रथम वर्ष की विभागीय कक्षाओं में छात्रों की संख्या 30 से 60 तक सीमित कर दी गई है.
छात्रों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए कैंपस में 24/7 मनोचिकित्सकों और काउंसलर्स की टीम तैनात की गई है, जिसमें देश के शीर्ष अस्पतालों जैसे AIIMS और VIMHANS के विशेषज्ञ शामिल हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यदि कोई छात्र बाहर से भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं लेता है, तो उसका पूरा खर्च आईआईटी दिल्ली प्रशासन वहन कर रहा है. ‘यूजी बडी’ (UG Buddy) कार्यक्रम का विस्तार करके अब ‘पीजी बडी’ और ‘इंटरनेशनल बडी’ प्रोग्राम भी शुरू किए गए हैं.
छात्रों और शिक्षकों के बीच की दूरी खत्म करने के लिए ‘छात्र-शिक्षक संवाद परिषद’ (STIC) के मार्गदर्शन में हर सेमेस्टर में नियमित मिलन-सत्र आयोजित किए जा रहे हैं. संकाय सदस्य (Faculty) ओपन-डोर ऑफिस आवर्स, प्रोजेक्ट गाइडेंस और हॉस्टल एक्टिविटीज के जरिए छात्रों से सीधे संवाद कर रहे हैं. पढ़ाई में पिछड़ रहे छात्रों के लिए ‘शैक्षणिक प्रगति समूह’ (APG) के माध्यम से शाम के समय स्पेशल ट्यूशन और बैकलॉग में मदद दी जा रही है.
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छात्रों की हर छोटी-बड़ी समस्या के समयबद्ध समाधान के लिए एक सेंट्रलाइज्ड री-ट्रेकिंग ERP पोर्टल, विद्यार्थी कल्याण बोर्ड (BSW), विशेष SC/ST व OBC सेल्स और आंतरिक शिकायत समितियां चौबीसों घंटे काम कर रही हैं. शिकायतों के निष्पक्ष निपटारे के लिए एक बाहरी ‘लोकपाल’ (Ombudsperson) नियुक्त करने की दिशा में भी काम जारी है, ताकि किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो.
आईआईटी दिल्ली का ‘विविधता एवं समावेशन कार्यालय’ (Office of Diversity and Inclusion) साल 2022 से ही परिसर में भेदभाव-रहित माहौल बनाने के लिए काम कर रहा है. नए छात्रों के इंडक्शन प्रोग्राम में जाति, लिंग, भाषा, क्षेत्र और जातीयता से जुड़े अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष पक्षपात के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष संवेदीकरण (Sensitisation) सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि हर छात्र खुद को सुरक्षित और समर्थित महसूस करे.
-भारत एक्सप्रेस
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