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‘INDIA’ ब्लॉक में नेतृत्व पर फिर घमासान, संजय राउत के बाद कार्ति चिदंबरम का बड़ा बयान

 INDIA alliance leadership row: विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर एक बार फिर घमासान छिड़ गया है. बुधवार (18 फरवरी) को महाराष्ट्र के प्रमुख अखबार ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय ने कांग्रेस और गठबंधन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए. वहीं दूसरी और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी लीडरशिप को लेकर बड़ा बयान दिया है. इसके बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है.

‘फ्रेंडली फाइट’ के चलते उठे सवाल

संपादकीय में कहा गया कि ‘INDIA’ ब्लॉक इस समय एक चौराहे पर खड़ा है और उसे यह तय करना होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर संकट की स्थिति में नेतृत्व कौन करेगा. लेख में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन या किसी अन्य नेता के नाम पर चर्चा की जरूरत बताई गई. साथ ही यह भी कहा गया कि महत्वपूर्ण राज्य चुनावों से पहले गठबंधन के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान विपक्षी एकता को कमजोर कर सकती है. इसे ‘फ्रेंडली फाइट’ यानी अपने ही सहयोगियों के बीच टकराव बताया गया.

गौरतलब है कि सामना के कार्यकारी संपादक शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत हैं, इसलिए इस संपादकीय को उनके रुख से जोड़कर भी देखा जा रहा है. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे अखबार का विचार बताया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे गठबंधन के भीतर चल रही असहमति के संकेत के तौर पर देख रहे हैं.

कांग्रेस सांसद ने क्या कहा?

इस बीच कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने भी बड़ा बयान दिया है. तमिलनाडु के शिवगंगा से लोकसभा सांसद और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने गठबंधन में रोटेशन सिस्टम लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि नेतृत्व हर साल बदलता और अलग-अलग दलों को जिम्मेदारी दी जाती, तो गठबंधन अधिक मजबूत और संतुलित बन सकता था.


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कार्ति चिदंबरम ने इसे राजनीतिक रूप से परिपक्व सुझाव बताते हुए कहा कि यदि किसी क्षेत्रीय दल के नेता को संयोजक बनाया जाता, तो गठबंधन को व्यापक स्वीकार्यता मिलती. उनके इस बयान के बाद विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर बहस और तेज हो गई है. हालांकि कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने ‘INDIA’ ब्लॉक के भीतर समन्वय और नेतृत्व संरचना पर नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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