देश

लोकसभा की 800+ सीटें! UP में 120 तो तेलंगाना में 26, क्या बदल जाएगा देश का प्रधानमंत्री चुनने वाला गणित?

रिपोर्ट- प्रशांत त्यागी


Delimitation Commission Bill 2026: भारत सरकार 2026 के बजट सत्र के विशेष सत्र में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए परिसीमन विधेयक (Delimitation Commission Bill) लाने पर विचार कर रही है. यह कदम नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत सीटों के पुनर्गठन से जुड़ा माना जा रहा है. प्रस्तावित प्रक्रिया 2011 की जनगणना या उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के आधार पर की जा सकती है, ताकि जनसंख्या में हुए बदलाव के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों को नया आकार दिया जा सके.

क्या है परिसीमन और क्यों जरूरी

परिसीमन का मतलब है निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करना. यह आमतौर पर जनसंख्या के आधार पर होता है, ताकि हर क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधियों का अनुपात संतुलित रहे. परिसीमन आयोग अपनी सिफारिशें देता है, जिन्हें संसद की मंजूरी के बाद लागू किया जाता है. इससे कई सीटों की सीमाएं बदल सकती हैं और राजनीतिक समीकरण पर असर पड़ सकता है.

सीटों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 816 करने पर विचार हो रहा है. इसमें 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. कुल सीटों में बढ़ोतरी करीब 50% हो सकती है, लेकिन इसका असर सभी राज्यों में समान नहीं होगा.

उत्तर बनाम दक्षिण की बहस

विपक्ष, खासकर कांग्रेस, का कहना है कि इस प्रक्रिया से उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा फायदा होगा. अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं. तेलंगाना की सीटें 17 से बढ़कर 26 हो सकती हैं. इसी के साथ उत्तरी राज्यों को 200 से ज्यादा अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं. वहीं, दक्षिणी राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 तक जा सकती हैं. इससे संसद में शक्ति संतुलन हिंदी पट्टी की ओर झुक सकता है.

दक्षिणी राज्यों की चिंता

दक्षिण भारत के कई राज्यों का तर्क है कि उन्होंने परिवार नियोजन को बेहतर तरीके से लागू किया है, जिससे उनकी जनसंख्या वृद्धि कम रही. ऐसे में यदि सीटें केवल जनसंख्या के आधार पर बढ़ेंगी, तो उन्हें अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलेगा. इससे उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर जाने का खतरा महसूस हो रहा है.


ये भी पढ़ें: नीतीश कुमार की आखिर क्या मजबूरी थी? आनंद मोहन का ‘पर्ची’ प्रहार; NDA में मचाई हलचल


राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है, वहीं बीजेपी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में कदम बताया है. कुल मिलाकर, परिसीमन विधेयक को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जिसमें प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

Recent Posts

कांग्रेस की CWC मीटिंग में इस नेता ने क्यों लिया नीतीश कुमार का नाम, सोनिया गांधी ने क्या कहा?

Congress CWC Meeting में नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर जाने को लेकर चर्चा…

15 minutes ago

पाइप बिछाने से आगे की कहानी: कैसे स्वतंत्र देव सिंह ने बुंदेलखंड में पानी की किल्लत को दी चुनौती?

UP Politics: बुंदेलखंड में स्वतंत्र देव सिंह के पानी अभियान का मुख्य फोकस घर-घर नल…

31 minutes ago

मायके वालों को कमरे में बंद कर पीटा, फिर रेलवे ट्रैक पर पत्थरबाजी; दहेज विवाद में मचा बवाल

Amroha Dowry Case: अमरोहा में दहेज उत्पीड़न की शिकायत करने बहन की ससुराल पहुंचे मायके…

34 minutes ago

पल्लवी पटेल की सियासत: सामाजिक न्याय, जातिगत प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं की पहुंच की पूरी कहानी

Pallavi Patel Social Justice Politics: पल्लवी पटेल की राजनीति उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के…

49 minutes ago

7 जीत, अपनी पार्टी और सीबीआई से राहत: कुंडा में कैसे चलता है राजा भैया का एकछत्र राज?

UP Politics; लगातार 7 जीत, निर्दलीय से अपनी पार्टी का सफर और सीबीआई कोर्ट से…

55 minutes ago

द ट्रेजरी के रखवाले: सुरेश खन्ना ने कैसे तैयार किया यूपी का ट्रिलियन-डॉलर इकोनॉमिक ब्लूप्रिंट?

उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की रणनीति में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, MSME,…

1 hour ago