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आंखों के तारे से साइडलाइन तक! जानें राघव चड्ढा के सियासी पतन की पूरी इनसाइड स्टोरी, क्या बदलेगा पंजाब का समीकरण?

Raghav Chadha AAP Conflict: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर की लड़ाई अब सतह पर आ चुकी है. पिछले डेढ़ साल से चली खींचतान के बाद AAP ने कार्रवाई करते हुए बागी हो चुके राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया है. उनकी जगह पंजाब के ही सांसद अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने सदन में उनके बोलने का समय भी काट दिया है.

पार्टी के इस कदम से आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक राघव चड्ढा ने कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर पार्लियामेंट में उनके बोलने का अधिकार छीनने का आरोप लगाया. उन्होंने एक शेर के जरिये केजरीवाल एंड पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा,

“मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है.”

राघव चड्ढा के इस बयान पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. एक तरफ आम आदमी पार्टी के नेताओं ने राघव चड्ढा पर बीजेपी की भाषा बोलने और पीएम मोदी का आरोप लगाया है. तो वहीं बीजेपी के नेताओं ने इसे जेबकतरों की लड़ाई बताया. तो सवाल ये उठता है कि आखिर कभी केजरीवाल के आंखों का तारा रहा यह सांसद आज इस दहलीज पर कैसे पहुंचा कि उसे राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया? सवाल ये भी है कि राघव चड्ढा का पॉलिटिकल पावर क्या आम आदमी पार्टी को पंजाब में बड़ा सरप्राइज दे सकता है?

केजरीवाल के “ब्लू-आइड बॉय” से साइडलाइन तक

पेशे से CA और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा पाने वाले राघव चड्ढा साल 2012 में AAP की शुरुआत से ही पार्टी से जुड़ गए थे. नीली आंखों वाले इस नौजवान ने सिर्फ 24 साल की उम्र में टीवी डिबेट्स का चेहरा बन गए. उनकी जबरदस्त नॉलेज और मुद्दों की समझ ने उन्हें केजरीवाल की आंखों का तारा बना दिया. एक समय तो यह भी कहा जाने लगा कि अगर मनीष सिसोदिया केजरीवाल के राइट हैंड हैं तो राघव चड्ढा उनके लेफ्ट हैंड हैं.

साल 2015 में दिल्ली सरकार में उन्हें पार्टी ने वित्त मंत्री के सलाहकार के पद पर बैठा दिया. साल 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में वो दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट से विधायक चुने गए. जिसके बाद उन्हें दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई.

राघव चड्ढा ने करियर में सबसे बड़ी छलांग तब लगाई जब उन्हें साल 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में को-इनचार्ज बनाया गया. आप की पंजाब में जीत में राघव चड्ढा अहम रणनीतिकार माने गए. उनकी जबरदस्त राजनीतिक प्रतिभा को देखते हुए केजरीवाल ने भगवंत मान सरकार में एडवाइजरी कमेटी का चेयरमैन बना दिया. जिसपर बेहद राजनीतिक संग्राम भी हुआ. विपक्ष ने तो यहां तक कह दिया कि भगवंत मान का रिमोट कंट्रोल राघव चड्ढा के हाथ में है.

यहां से शुरू हुई दूरियां

साल 2022 में आम आदमी पार्टी ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा सांसद बनाकर दिल्ली भेजा. जहां उन्होंने आम आदमी पार्टी की तरफ से जबरदस्त बैटिंग की, लेकिन साल 2024 तक आते-आते राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच दूरियां बढ़नी शुरू हो गईं.

साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया जाता है. उस समय विपक्ष ने बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ जबरदस्त मोर्चा खोल दिया. आम आदमी पार्टी के और नेता जहां केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ बोल रहे थे, उस समय राघव चड्ढा इंग्लैंड में आंख की सर्जरी करा रहे थे. सर्जरी से दिल्ली वापस आने के बाद भी उन्होंने पार्टी के मुद्दों से दूर रहे. जिससे आप आलाकमान के बीच यह संदेश गया कि राघव चड्ढा कंप्रोमाइज हो चुके हैं. पार्टी ने उन्हें साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पंजाब से दूर रखा. उन्हें स्टार प्रचारकों की लिस्ट से हटा दिया गया.

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पार्टी के इस संदेह को बल तब मिला, जब साल 2026 में केजरीवाल और सिसोदिया को शराब नीति केस में बरी होने के बाद आयोजित पार्टी के प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसभा में नहीं पहुंचे. उन्होंने पार्टी के बड़े कार्यक्रमों और केजरीवाल के नेतृत्व वाले इवेंट्स से दूरी बनाकर रखी.

पार्टी से साइडलाइन होने के बाद राघव चड्ढा अब संसद में आम जनता के मुद्दों को उठाने लगे, लेकिन वो बीजेपी सरकार पर सीधा हमला या पार्टी की लड़ाई वाली लाइन कम अपनाई. एक तरफ जहां लोगों ने उनके इस कदम की जमकर तारीफ की, वहीं खुद आम आदमी पार्टी ने इसे PR करार दिया.

पंजाब में दे सकते हैं बड़ा सरप्राइज?

साल 2022 में पंजाब चुनाव में बनाई गई राघव चड्ढा की रणनीती ने आम आदमी पार्टी को फर्श से अर्श तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. पंजाब में आप की इस जीत ने राष्ट्रीय स्तर पर उनके राजनीतिक कद को काफी बढ़ा दिया. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पंजाब AAP में उनका कद काफी घट चुका है.

चड्ढा आप की स्टार प्रचारकों की लिस्ट में पहले से ही नहीं थे, अब उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया है. जिसकी वजह से राघव चड्ढा का पंजाब में उतनी पकड़ नहीं बची है जितनी साल 2022 के समय थी. ग्रासरूट संगठन या स्थानीय लीडरशिप तक उनकी पकड़ बेहद ढीली है. तो राघव चड्ढा के साल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आप को बड़ा सरप्राइज देने की संभावना बहुत कम है.

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बीजेपी में हो सकते हैं शामिल

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि राघव चड्ढा बीजेपी जॉइन कर सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है. अगर वे पार्टी छोड़ते हैं तो उनका छोटा फ्रैक्शनल असर हो सकता है, लेकिन आम आदमी पार्टी को बड़ा डेंट देने के पोजिशन में वो बिल्कुल नहीं हैं.

राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाये जाने को जहां आम आदमी पार्टी ने सामान्य ऑर्गनाइजेशनल चेंज बताया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में इसके पीछे लंबे समय से बन रही दूरी, चुप्पी और अनुशासनहीनता बताया गया है. पंजाब में आम आदमी पार्टी अभी भी सबसे मजबूत पार्टी बनी हुई है, लेकिन चड्ढा का पॉलिटिकल वेट पहले जितना नहीं रहा. इसलिए साल 2027 में कोई बड़ा सरप्राइज उनकी तरफ से उम्मीद नहीं की जा सकती है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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