मराठा आरक्षण (Maratha Aarakshan) के लिए 29 अगस्त से मुंबई के आज़ाद मैदान में अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) ने मंगलवार (2 सितंबर) को महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद संकेत दिया कि वह अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हैं.
राज्य प्रतिनिधिमंडल में मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) मुद्दे पर कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी प्रथम के वंशज, मंत्री माणिकराव कोकाटे और शिवेंद्र भोसले शामिल थे. जरांगे से मिलने आए प्रतिनिधिमंडल के अधिकतर मंत्री मराठा समुदाय से थे.
मंत्रियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठों को कुनबी का दर्जा देने के लिए जल्द ही एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया जाएगा. मनोज जरांगे के हालिया विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से यह सरकार का उनसे पहला संपर्क था.
प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने कहा कि मराठा समुदाय (Maratha Community) की मांगें पहले ही लिखित रूप में सरकार के सामने रखी जा चुकी हैं.
मनोज जरांगे ने कहा, “पहला मुद्दा हैदराबाद गजट को तुरंत लागू करने की मांग थी. सरकार ने अब इस पर फैसला ले लिया है. मंत्री (राधाकृष्ण) विखे पाटिल ने आश्वासन दिया है कि अगर प्रदर्शनकारी प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो सरकार इस पर एक जीआर जारी करेगी.”
उन्होंने आगे कहा कि उप-समिति ने हैदराबाद गजट को लागू करने की प्रस्तावित मांग को मंज़ूरी देने का फ़ैसला किया है. इस सरकारी फ़ैसले के अनुसार, एक कार्ययोजना प्रस्तावित है जिसके तहत गांव के मराठा समुदाय के लोगों को सत्यापन के बाद कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे, अगर उनके रिश्तेदारों, कुल के सदस्यों या उसी गांव के लोगों को पहले ही ऐसे प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले आंदोलनकारियों के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया था जिसमें मराठा आरक्षण मुद्दे पर कैबिनेट उप-समिति के साथ बातचीत के लिए कुछ समय मांगा गया था. पिछले सप्ताह पुलिस द्वारा सभी प्रदर्शनकारियों को आंदोलन स्थल खाली करने का नोटिस जारी करने के बाद, जारंगे पाटिल ने कहा था कि चाहे उनकी जान भी चली जाए, वे आज़ाद मैदान नहीं छोड़ेंगे.
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की चल रही मांग में विशेष रूप से इस समुदाय को कुनबी जाति का दर्जा दिए जाने के संदर्भ में हैदराबाद गजट की महत्वपूर्ण भूमिका है.
निज़ामकालीन सरकार द्वारा जारी 1918 का हैदराबाद गजट हैदराबाद राज्य (अब महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र) के मराठा समुदाय सहित कुछ समुदायों को कुनबी के रूप में मान्यता देता है, जो महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी है.
हैदराबाद राज्य में मराठा समुदाय की प्रशासनिक सत्ता और रोज़गार दोनों में महत्वपूर्ण उपस्थिति थी. इसे स्वीकार करते हुए निज़ाम सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस समुदाय को कुनबी के रूप में वर्गीकृत किया और एक औपचारिक आदेश के माध्यम से उन्हें शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण प्रदान किया.
यह आदेश हैदराबाद राज्य के आधिकारिक गजट में प्रकाशित हुआ था, इसीलिए इसे “हैदराबाद गजट” के रूप में जाना जाने लगा. यह दस्तावेज़ आज भी मान्य है और कई चल रहे कानूनी मामलों में स्वीकार किया जाता है. महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की पूर्व की मांगों के दौरान भी इसका हवाला दिया गया था.
हैदराबाद गजट में आधिकारिक सरकारी दस्तावेज़ शामिल हैं, जो मराठा समुदाय ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा रहा है. यही कारण है कि मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल न केवल हैदराबाद गजट को लागू करने की मांग कर रहे हैं, बल्कि सतारा और बॉम्बे गजट के रिकॉर्ड को भी इसमें शामिल करने की मांग कर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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