देश

MRM का 24वां स्थापना दिवस: इंसानियत, एकता और राष्ट्रहित के लिए साझा संकल्प

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने आज (24 दिसंबर) को अपना 24वां स्थापना दिवस ऐसे समय में मनाया जब देश और दुनिया सामाजिक, धार्मिक और मानवीय चुनौतियों के एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं. इस अवसर पर दिल्ली के पहाड़गंज स्थित मंच कार्यालय में एक महत्वपूर्ण और व्यापक राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के कोने-कोने से कार्यकर्ता ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से जुड़े. बैठक की अध्यक्षता मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने की. यह आयोजन आत्ममंथन, खुले संवाद और भविष्य की दिशा तय करने का सशक्त मंच बनकर उभरा, जहां देश से जुड़े अहम मुद्दों से लेकर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों तक पर गंभीर, संवेदनशील और जिम्मेदार चर्चा हुई.

बैठक में मंच के सभी राष्ट्रीय संयोजक, विभिन्न प्रकोष्ठों के संयोजक और सह-संयोजक, राज्यों और प्रांतों के पदाधिकारी समेत लगभग 1000 कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की. बीते एक वर्ष के दौरान मंच द्वारा किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई और आने वाले समय में संगठन को किस दिशा में आगे बढ़ाना है, इस पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ. मंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसका उद्देश्य केवल संगठनात्मक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि देश, समाज और इंसानियत के हित में एक सकारात्मक, रचनात्मक और राष्ट्रहितकारी भूमिका निभाना ही उसकी मूल सोच और प्रतिबद्धता है.

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा: इंसानियत को शर्मसार करने वाला सच

बैठक में जिस मुद्दे पर सबसे अधिक संवेदनशील और भावनात्मक चर्चा हुई, वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रही हिंसा का था. मंच ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता, पीड़ा और आक्रोश व्यक्त करते हुए साफ कहा कि ऐसी हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और यह सीधे-सीधे मानवता के खिलाफ अपराध है. बैठक में कहा गया कि पड़ोसी देश में धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाना न सिर्फ वहां की सामाजिक एकता को तोड़ता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और सौहार्द के लिए भी खतरा पैदा करता है.

सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर भारत सरकार से आग्रह किया जाएगा कि वह राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए, ताकि बांग्लादेश सरकार पर आवश्यक दबाव बने और वहां अल्पसंख्यकों की जान-माल, धार्मिक स्थलों और सम्मान की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. मंच ने यह भी कहा कि धर्म के नाम पर की जाने वाली हिंसा किसी एक देश या समुदाय की समस्या नहीं होती, बल्कि यह पूरी मानवता को कमजोर करने वाली प्रवृत्ति है. अगर आज हम ऐसे अत्याचारों पर चुप रहते हैं, तो यह चुप्पी भी अन्याय को बढ़ावा देती है. इसलिए जरूरी है कि इंसानियत के पक्ष में आवाज उठाई जाए और हर जगह अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जाए.

धार्मिक उन्माद और आतंकवाद के खिलाफ साफ संदेश: देश को दंगा मुक्त रखने की अपील

देश में बढ़ते धार्मिक उन्माद और नफरत पर भी खुलकर बात हुई. मंच ने कहा कि जो लोग नफरत फैलाते हैं, वे न सिर्फ इंसानियत के खिलाफ हैं बल्कि देश की एकता और अखंडता के भी दुश्मन हैं. चाहे वह किसी भी धर्म के खिलाफ हो—नबी हजरत मोहम्मद साहब, ईसा मसीह, ईसाई धर्म या किसी अन्य आस्था के प्रति अपमान—ऐसी हरकतों की मंच ने कड़ी निंदा की. खास तौर पर मध्य प्रदेश में मस्जिदों को तोड़ने की धमकियों, हजरत मोहम्मद साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणियों और क्रिसमस के समय ईसाई समुदाय के खिलाफ हो रही घटनाओं पर चिंता जताई गई.

मंच ने कहा कि ऐसी हरकतें भारत की छवि को दुनिया के सामने नुकसान पहुंचाती हैं, और देश का कोई भी जागरूक नागरिक इन्हें बर्दाश्त नहीं करेगा. मंच ने आम लोगों से अपील की कि अपने-अपने धर्मों पर चलें, सभी धर्मों का सम्मान करें, और किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ गलत भाषा या व्यवहार से बचें. यह भी कहा गया कि कोई भी धर्म दूसरे धर्म से नफरत करना नहीं सिखाता. साथ ही, धर्मांतरण और धार्मिक उन्माद से दूर रहने की भी अपील की गई. इसके अलावा इस बात पर भी चिंता जताई गई कि आधी दुनिया नफरत और युद्ध के आग में झुलस रही है, यह अपने आप में शर्मिंदगी की बात है.

नौजवानों से उम्मीद: शिक्षा, रोजगार और नशा मुक्त भारत

बैठक में देश के नौजवानों की भूमिका को लेकर विशेष और गंभीर चर्चा हुई. मंच ने कहा कि भारत एक युवा देश है, जहां लगभग आधी आबादी युवाओं की है, और यही युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य की असली नींव है. यदि युवाओं को सही दिशा, अच्छी शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलें, तो भारत को दुनिया की अग्रणी ताकत बनने से कोई नहीं रोक सकता. बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के साथ-साथ युवाओं को नशा मुक्त भारत के संकल्प से जोड़ना बेहद जरूरी है, क्योंकि नशा युवाओं की ऊर्जा, सोच और भविष्य—तीनों को खोखला कर देता है.

यह भी कहा गया कि आज भारतीय युवा अपनी मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी के बल पर दुनिया भर में—अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक—अपनी पहचान बना रहे हैं और वहां की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि हम अपने देश, अपने समाज और अपनी मिट्टी के लिए क्या कर रहे हैं. मंच ने युवाओं से भावनात्मक अपील की कि वे नकारात्मक और भटकाने वाले रास्तों से दूर रहें, नफरत और हिंसा से बचें, और अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने में लगाएं. युवा यदि ठान लें, तो देश की दिशा और दशा दोनों बदली जा सकती हैं.

पर्यावरण संरक्षण: आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी

बैठक में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर और संवेदनशील चर्चा हुई. मंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक का नैतिक और मानवीय कर्तव्य है. बढ़ते प्रदूषण, तेजी से कटते जंगल, सूखते जल स्रोत और प्लास्टिक के बेहिसाब इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा गया कि अगर आज हमने अपनी आदतें नहीं बदलीं, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा. मंच ने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने, हवा और पानी को प्रदूषित होने से बचाने, पानी की बर्बादी रोकने और रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की अपील की.

बैठक में यह सवाल भी गंभीरता से उठाया गया कि हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को किस तरह का वातावरण सौंप कर जायेंगे—उन्हें सांस लेने के लिए कैसी हवा मिलेगी, पीने के लिए कैसा पानी मिलेगा और जीने के लिए कैसा जीवन होगा. मंच ने कहा कि आज हम जो फैसले ले रहे हैं, जो लापरवाही या जिम्मेदारी दिखा रहे हैं, वही तय करेगा कि भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ होगा या संकटों से भरा. इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल नारे या औपचारिक चर्चा तक सीमित न रखकर, इसे अपने रोज़मर्रा के व्यवहार का हिस्सा बनाने का संकल्प लेने की जरूरत है.

23 साल का सफर: एकता और इंसानियत का रास्ता

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का 24वां स्थापना दिवस सिर्फ एक साल पूरा होने का जश्न नहीं था, बल्कि राष्ट्र, समाज और इंसानियत के प्रति अपनी जिम्मेदारी को फिर से याद करने का दिन बना. बैठक में पारित प्रस्तावों से साफ संदेश गया कि मंच का रास्ता संवाद, आपसी सम्मान, राष्ट्रीय एकता और मानवीय मूल्यों से होकर गुजरता है. कार्यक्रम का समापन इस भरोसे के साथ हुआ कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में है, और इस विविधता को सम्मान, बातचीत और सहयोग के जरिए ही और मजबूत किया जा सकता है.

महत्वपूर्ण लोगों की शिरकत

बैठक में मोहम्मद अफजाल, विराग पाचपोर, डॉ शाहिद अख्तर, गिरीश जुयाल, अबू बकर नकवी, एस के मुद्दीन, इस्लाम अब्बास, सैयद रजा हुसैन रिज़वी, डॉ मजीद तालिकोटी, हबीब चौधरी, रेशमा हुसैन, डॉ शालिनी अली, शाहिद सईद, डॉ ताहिर हुसैन, इरफान अली पीरजादा, हाफिज साबरीन, इमरान चौधरी, मज़हिर खान, शिराज़ कुरैशी, डॉ केशव पटेल, आशिद खान, शाकिर हुसैन, डॉ बबली परवीन, डॉ तसनीम पटेल, अल्तमश बिहारी, कर्नल ताहिर मुस्तफा, डॉ रेहान, ठाकुर राजा रईस, डॉ हसन नूरी, तुषारकांत, इलियास अहमद, फैज खान, ताहिर शाह, सूफी शाह सैयद जियारत अली, अंजुम अंसारी, शहनाज अफजल, कल्लू अंसारी, शमीम बनो, कारी अबरार जमाल, दादू खान, डॉ शाइस्ता, शफकत कादरी राजा, डॉ शादाब तबस्सुम, तौकीर रजा, फरीद साबरी, डॉ सलीम राज समेत अनेकों महत्वपूर्ण लोगों ने शिरकत की.

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-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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