देश

PM मोदी ने बनारस-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी, अब महज 7.45 घंटे में पूरी होगी यात्रा

देश की सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी बनारस से मध्य प्रदेश के खजुराहो तक की यात्रा अब और भी तेज और आरामदायक हो गई है. रेल मंत्रालय ने यात्रियों और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 26506/26505 बनारस-खजुराहो-बनारस वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की है. शनिवार, 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विशेष गाड़ी का उद्घाटन किया.

उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री का स्वागत उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया. इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने तीन अन्य महत्वपूर्ण वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी वर्चुअली हरी झंडी दिखाई, जिनमें अर्नाकुलम से बंगलुरू, लखनऊ से सहारनपुर और पंजाब के फिरोजपुर से दिल्ली जाने वाली ट्रेनें शामिल हैं.

बनारस-खजुराहो रूट पर समय की बचत

खास तौर पर बनारस-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस, गुरुवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी सभी छह दिन चलेगी. यह ट्रेन अपने मार्ग में विंध्याचल, प्रयागराज छिवकी, चित्रकूट धाम, बांदा और महोबा स्टेशनों पर रुकेगी. यह तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन अब यह यात्रा मात्र 7 घंटे 45 मिनट में पूरी करेगी. यह एक महत्वपूर्ण सुधार है, क्योंकि पहले उपलब्ध सीधी ट्रेन से इसी यात्रा में 10 घंटे 25 मिनट का समय लगता था. इस नई सेवा से यात्रियों को आरामदायक और समय बचाने वाली यात्रा का अनुभव मिलेगा, साथ ही यह क्षेत्र के सांस्कृतिक, पर्यटन और आर्थिक विकास को भी गति प्रदान करेगी.

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का संगम

इस ट्रेन के शुरू होने से दो महत्वपूर्ण शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हुई है. बनारस (वाराणसी), जिसे विश्व के प्राचीनतम नगरों में से एक माना जाता है, हिन्दू धर्म के पवित्रतम स्थलों में से है. यह काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ कबीर, मुंशी प्रेमचंद, पंडित रवि शंकर जैसी महान हस्तियों का गहरा जुड़ाव रहा है. यह नगर बौद्ध धर्म (सारनाथ) और जैन धर्म से भी जुड़ा है. बनारस अपने प्रसिद्ध घाटों, शास्त्रीय संगीत की परंपरा (बनारस घराना) और रेशम एवं जरी के व्यापार के लिए भी जाना जाता है.

विरासत के दृष्टिकोण से विश्वस्तरीय मान्यता

वहीं, खजुराहो, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है. खजुराहो के मंदिर अपनी अद्भुत नागर वास्तुकला, जटिल नक्काशी और कामुक कला की मूर्तियों के लिए विश्वविख्यात हैं. चंदेल राजवंश द्वारा 950 से 1050 ईस्वी के बीच निर्मित ये मंदिर, विशेष रूप से कंदारिया महादेव मंदिर के लिए जाने जाते हैं. यह अद्वितीय स्मारक समूह कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के दृष्टिकोण से विश्वस्तरीय मान्यता रखता है.

बनारस और खजुराहो, दोनों ही पर्यटन और धार्मिक महत्व की दृष्टि से अद्वितीय हैं. यह नई वंदे भारत एक्सप्रेस इन दोनों सांस्कृतिक ध्रुवों को जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

यह भी पढ़िए: किसको लगा 65 वोल्ट का झटका? सीतामढ़ी में जमकर गरजे पीएम मोदी

कोमल शर्मा, वरिष्ठ संवाददाता

Recent Posts

Gurugram: PG में मृत मिली एटा की 20 साल की लड़की, संदेह उसके लिव-इन-पार्टनर पर; मां ने लगाया हत्या का आरोप

Gurugram PG woman dead live-in partner: गुरुग्राम के सेक्टर-38 स्थित पीजी में 20 वर्षीय युवती…

3 hours ago