पीएम मोदी ने दुनिया के सामने गिनाईं भारत की उपलब्धियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया में ताकत हासिल करने की होड़ लगी है, लेकिन भारत का नजरिया इससे अलग है. भारत तकनीक, डेटा और नवाचार का इस्तेमाल केवल अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए कर रहा है. उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत अपनी नीतियों, आर्थिक सुधारों और ऊर्जा परिवर्तन के जरिए आगे बढ़ रहा है.
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का मौजूदा दशक दुनिया के लिए कई बड़ी चुनौतियां लेकर आया है. पहले कोरोना महामारी ने देशों की अर्थव्यवस्थाओं और जनजीवन को प्रभावित किया. इसके बाद अलग-अलग हिस्सों में युद्ध शुरू हो गए. अब व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं.
उन्होंने कहा कि दुनिया एक संकट से उबरने की कोशिश करती है, तभी दूसरी चुनौती खड़ी हो जाती है. कभी देशों को जोड़ने वाली सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज, भुगतान व्यवस्था और तकनीक जैसी चीजें अब दबाव बनाने के साधन बनती जा रही हैं.
प्रधानमंत्री ने डिजिटल व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने तकनीक की मदद से सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने का इंतजाम किया है. इससे भ्रष्टाचार कम करने, लोगों की सुविधा बढ़ाने और सरकार तथा नागरिकों के बीच सीधा संपर्क बनाने में मदद मिली है.
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए मोदी ने बताया कि 2014 में देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 75 गीगावाट थी, जो अब लगभग 300 गीगावाट तक पहुंच गई है. यानी इस दौरान क्षमता में करीब चार गुना बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में हो रहा यह बदलाव देश में नए अवसर भी पैदा कर रहा है.
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, बिग कैट एलायंस, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे जैसी पहलों का भी उल्लेख किया. उन्होंने मिशन लाइफ को भी पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया.
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मोदी ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है और देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत स्थिति में है. उनके मुताबिक, इसी आर्थिक मजबूती के बीच भारत की सॉवरेन रेटिंग में भी सुधार हो रहा है.
उन्होंने जीएसटी, दिवालियापन कानून और श्रम सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि जीएसटी ने देश में टैक्स व्यवस्था को एक राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में मदद की है. वहीं, 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेटा गया है और कारोबार से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में सुधार केवल जरूरत पूरी करने का जरिया नहीं हैं, बल्कि देश का संकल्प हैं. सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और विकास के नए अवसर तैयार करने पर काम कर रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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