नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने महान समाज सुधारकों महात्मा अय्यंकाली और श्री नारायण गुरु को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी. दोनों नेताओं ने इन समाज सुधारकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार और संघर्ष आज भी समानता, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक जीवन की दिशा में काम करने वाले लोगों को प्रेरणा देते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा अय्यंकाली को सामाजिक न्याय की लड़ाई के एक बड़े अग्रदूत के तौर पर याद किया. उन्होंने कहा कि अय्यंकाली ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित और हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों और उनके बेहतर भविष्य के लिए लगा दिया.
प्रधानमंत्री ने खास तौर पर शिक्षा के अवसरों को बढ़ाने और खेतिहर मजदूरों की स्थिति सुधारने के उनके प्रयासों का जिक्र किया. उनका कहना था कि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए अय्यंकाली का काम सिर्फ अपने दौर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आज भी सामाजिक सशक्तीकरण की कोशिशों को दिशा देता है.
मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि महात्मा अय्यंकाली का जीवन उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो समाज के कमजोर तबकों को आगे बढ़ाने और उन्हें बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए काम कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने श्री नारायण गुरु को महान समाज सुधारक, आध्यात्मिक नेता और विचारक बताते हुए उनके योगदान को भी नमन किया. उन्होंने कहा कि नारायण गुरु ने ऐसा समाज बनाने की दिशा में काम किया, जिसकी बुनियाद सम्मान, करुणा और समानता पर टिकी हो.
प्रधानमंत्री के मुताबिक, शिक्षा और ज्ञान को लेकर श्री नारायण गुरु का जोर बेहद महत्वपूर्ण था. उनके विचारों ने बड़ी संख्या में लोगों को सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी दोनों महान समाज सुधारकों को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की. श्री नारायण गुरु को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी आध्यात्मिक समझ और समानता तथा मानवीय गरिमा के प्रति प्रतिबद्धता ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है.
उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री नारायण गुरु ने लोगों को भेदभाव से ऊपर उठने और ज्ञान, करुणा तथा सामाजिक सद्भाव पर आधारित समाज बनाने की प्रेरणा दी. उनके आदर्श आज भी अधिक समावेशी और जागरूक भारत के निर्माण में रास्ता दिखाते हैं.
वहीं, महात्मा अय्यंकाली के योगदान को याद करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने शोषित और वंचित लोगों के अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और सामाजिक न्याय व समानता को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही.
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-भारत एक्सप्रेस
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