श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज दुनियाभर में ‘विश्व संस्कृत दिवस’ मनाया जा रहा है. इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश और दुनिया के तमाम लोगों को शुभकामनाएं दी हैं. पीएम मोदी ने संस्कृत भाषा के समृद्ध इतिहास और ज्ञान परंपरा का जिक्र करते हुए इसे भारत की प्राचीन पहचान और चेतना की मुख्य धारा बताया.
विश्व संस्कृत दिवस के मौके पर अपना संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन संस्कृत भाषा की अटूट और कालातीत समृद्धि का उत्सव मनाने का दिन है. यह भाषा सदियों से भारत के ज्ञान, चिंतन, संस्कृति और रचनात्मकता को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाती आ रही है.
उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन काल से लेकर आज तक, जीवन के हर क्षेत्र में संस्कृत का एक गहरा और सकारात्मक प्रभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है.
अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कोने-कोने में संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन में जुटे लोगों की खुलकर तारीफ की. उन्होंने उन सभी छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के प्रयासों की सराहना की, जो दिन-रात संस्कृत पढ़ रहे हैं, पढ़ा रहे हैं और इसके विशाल ज्ञानकोश को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.
गौरतलब है कि हर साल श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन के दिन) को विश्व संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य संस्कृत भाषा के महत्व को समझना, इसे बढ़ावा देना और इसके माध्यम से प्राचीन भारतीय विज्ञान, दर्शन और साहित्य को सहेजना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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