Agra Shoe Industry Crisis: आगरा/जेपी सिंह: मिडिल ईस्ट (अमेरिका-इजरायल और ईरान) में लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों ने भारत के निर्यातकों की कमर तोड़ दी है. इस अंतरराष्ट्रीय संकट की सबसे तगड़ी आंच अब ताजमहल के शहर आगरा तक पहुंच गई है. विश्व प्रसिद्ध आगरा का जूता उद्योग इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. समंदर में फंसे जूतों के करोड़ों रुपये के माल ने यहां के कारोबारियों और मजदूरों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
समंदर में फंसा 200 करोड़ का माल (War Impact On Agra)
आगरा से हर साल मिडिल ईस्ट के देशों में करीब 1,125 करोड़ रुपये के जूतों का निर्यात होता है. लेकिन मौजूदा युद्ध के हालात में यह कारोबार लगभग ठप पड़ गया है. एक्सपोर्टर्स के मुताबिक, करीब 24 मिलियन डॉलर यानी लगभग 200 करोड़ रुपये का जूता इस समय समंदर में फंसा हुआ है. शिपमेंट को न तो आगे बढ़ने का रास्ता मिल रहा है और न ही वापस आने का.
कच्चे माल की कीमतों में आग (Agra shoes export)
समस्या सिर्फ शिपमेंट रुकने की ही नहीं है, बल्कि रॉ मटेरियल (कच्चे माल) की कीमतों में हो रहे बेतहाशा उछाल ने उद्योग का दिवाला निकाल दिया है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जूता उद्योग का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोकेमिकल्स पर निर्भर है. मिडिल ईस्ट संकट के कारण पेट्रोकेमिकल महंगा हो गया है, जिससे सोल, हील, पैकिंग और केमिकल सब कुछ महंगा हो चुका है. कुल लागत में 40 से 50 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया है.
रोजी-रोटी पर मंडराया संकट
आगरा का यह जूता उद्योग सिर्फ एक कारोबार नहीं है, बल्कि यह करीब 5 लाख लोगों के परिवारों की रोजी-रोटी का इकलौता जरिया है. पहले कोविड की मार, फिर कड़े टैरिफ नियम, उसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध और अब मिडिल ईस्ट संकट… लगातार मिल रहे इन झटकों ने इस इंडस्ट्री को चारों तरफ से घेर लिया है. स्थिति अब “आगे कुआं, पीछे खाई” वाली हो गई है. अगर यह संकट लंबा खिंचा तो हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे.
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सरकार से राहत पैकेज की गुहार
दूर होता युद्ध अब आगरा के उद्योग को बुरी तरह झुलसाने लगा है. संकट की इस घड़ी में जूता उद्योग के कारोबारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग की है. अब देखना यह होगा कि सरकार इस अहम उद्योग और 5 लाख परिवारों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाती है.
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