SIR के खिलाफ राहुल गांधी की याचिका सुप्रीम कोर्ट में फाइल नहीं हुई
Rahul Gandhi SIR petition: वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और INDIA गठबंधन को फिलहाल राहत नहीं मिली है. सोमवार को विपक्षी नेताओं ने मंडी हाउस से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और इसके बाद याचिका दाखिल की. हालांकि, दिनभर की राजनीतिक हलचल के बाद देर शाम खबर आई कि याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी. इसकी वजह याचिका में मिली 14 खामियां हैं.
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका की जांच के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता संख्या 3 से 11 तक के वकालतनामे उपलब्ध नहीं हैं. इन दस्तावेजों पर संबंधित नेताओं के हस्ताक्षर भी नहीं मिले. इस सूची में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, बिहार के नेता तेजस्वी यादव और सीपीआई महासचिव डी. राजा समेत नौ नेताओं के नाम शामिल हैं.
इन नेताओं में सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एम. ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं.
दरअसल, वकालतनामा एक जरूरी कानूनी दस्तावेज है. इसके जरिए याचिकाकर्ता अपने वकील को अदालत में उसकी ओर से मामला दाखिल करने और पैरवी करने की अनुमति देता है. ऐसे में इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं होने से याचिका की प्रक्रिया अधूरी मानी जा सकती है.
रजिस्ट्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रति जमा करने को कहा है. इसके अलावा याचिका दाखिल करने के लिए निर्धारित कोर्ट फीस में भी 220 रुपये कम पाए गए हैं. याचिका के समर्थन में लगाए गए कुछ दस्तावेजों की प्रतियां साफ नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए हैं. रजिस्ट्री ने चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के फैसले और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां पेन ड्राइव में देने को भी कहा है.
याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है. इसमें चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी बनाया गया है. रजिस्ट्री ने इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा है कि इस तरह की याचिका में चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत तौर पर पक्षकार बनाने की जरूरत क्यों पड़ी.
INDIA गठबंधन ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग से SIR से जुड़े फैसलों का पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने की मांग की है. इसमें संबंधित फाइलें, बैठकों के एजेंडे, कार्यवाही का विवरण और चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियां शामिल हैं.
फिलहाल, रजिस्ट्री की आपत्तियों के चलते याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है. यानी मामला खारिज होने और सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं होने में अंतर है. याचिका पर आगे की प्रक्रिया इन खामियों को दूर करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद ही आगे बढ़ सकेगी.
-भारत एक्सप्रेस
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