आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाओं के भ्रमित करने वाले विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई नही करने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, आंध्रप्रदेश और जम्मू कश्मीर सहित अन्य राज्यों को आड़े हाथ लिया है. कोर्ट ने इन सभी राज्यों के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने का आदेश दिया है. पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नही कर रहा है.
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने एलोपैथिक दवाओं की लक्षित करने वाले भ्रामक दावों और विज्ञापनों को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गोवा गुजरात और जम्मू-कश्मीर हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि आखिर कोर्ट के आदेशों बक पालन क्यों नही किया गया.
कोर्ट 7 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश द्वारा पहले के आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो हमें अदालत की अवमानना अधिनियम 1971 के तहत कार्यवाही शुरू करनी पड़ सकती है. मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी शादान फरासात ने कोर्ट को बताया कि अधिकांश राज्यों ने माफी को स्वीकार कर लिया है और उल्लंघन करने वालों को बरी कर दिया है.
भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मुद्दा 2022 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड द्वारा कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया था. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जुलाई में मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि आयुष मंत्रालय को भ्रामक विज्ञापनों पर दर्ज शिकायतों और उन पर हुई प्रगति के बारे में उपभोक्ताओं को विवरण उपलब्ध कराने के लिए एक डैशबोर्ड स्थापित करना चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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