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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भ्रामक विज्ञापनों पर निगरानी के लिए दो महीने के भीतर शिकायत निवारण तंत्र बनाने का निर्देश दिया, जिससे समाज को नुकसान से बचाया जा सके.

उल्लेखनीय है कि कुछ डिलीवरी ‘इ-कॉमर्स’ कंपनियों ने अपने ही ब्रांड के कुछ व्यंजनों को बाज़ार में उतारने की तैयारी कर ली है.

सुप्रीम कोर्ट ने आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई नहीं करने पर विभिन्न राज्यों को फटकार लगाई है, और इन राज्यों के मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई में पेश होने का आदेश दिया है.