TMC office ration card controversy: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होते ही भ्रष्टाचार के उन ‘अंधेरे कमरों’ के ताले टूटने लगे हैं, जहां सालों से गरीबों के हक के दस्तावेज कैद थे. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, बीरभूम के सैठिया और केतुग्राम इलाकों में टीएमसी कार्यालयों से भारी मात्रा में राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज बरामद (TMC office ration card) हुए हैं. इस खुलासे के बाद बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है और लोग पूछ रहे हैं कि आखिर एक पार्टी दफ्तर में आम जनता के कार्ड्स का क्या काम था?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों के मुताबिक, सैठिया के वार्ड नंबर 15 स्थित टीएमसी कार्यालय से सैकड़ों की संख्या में राशन कार्ड और बायोडाटा बरामद किए गए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले 15 सालों से इन कार्ड्स के जरिए गरीबों के नाम का राशन अवैध रूप से निकाला जा रहा था. भाजपा कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह एक संगठित ‘राशन घोटाला’ है, जिसमें सरकारी तंत्र और सत्ताधारी दल की मिलीभगत थी.
बीरभूम और केतुग्राम से मिली रिपोर्टों के अनुसार, बरामद दस्तावेजों में राशन कार्ड के साथ-साथ बायोडाटा और अन्य पहचान पत्र (जैसे सरकारी रिकॉर्ड्स) भी शामिल हैं. वायरल वीडियो में भाजपा समर्थक इन कार्ड्स को दिखाते हुए कह रहे हैं कि गरीबों को सरकारी योजनाओं से वंचित रखकर उनके हक की राशि और अनाज डकारा जा रहा था. इसे राज्य में ‘सिंडिकेट राज’ का सबसे बड़ा सबूत बताया जा रहा है, जहां जनता की पहचान को बंधक बनाकर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया.
जैसे ही इन दस्तावेजों की बरामदगी की खबर(TMC office ration card controversy) फैली पूरे इलाके में तनाव फैल गया. कई जगहों पर भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें हुईं. उत्तेजित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा. प्रशासन ने फिलहाल बरामद किए गए सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. बीरभूम के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं.
घटनाओं (TMC office ration card) के सामने आने के बाद से भाजपा इसे ‘ऑपरेशन क्लीन’ का नाम दे रही है, वहीं टीएमसी नेतृत्व ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. टीएमसी का कहना है कि उनके कार्यालयों पर अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है और राजनीतिक प्रतिशोध के तहत ये दस्तावेज वहां ‘प्लांट’ किए गए हैं.
हालांकि, स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है; उनका कहना है कि सरकारी दफ्तरों के बजाय पार्टी कार्यालयों में राशन कार्डों का मिलना इस बात की पुष्टि करता है कि 15 साल तक गरीबों को कैसे लूटा गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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