वॉशिंगटन: पांच साल पहले एक वीडियो कॉल ने एक भारतीय मूल के कारोबारी को पूरी दुनिया में सुर्खियों में ला दिया था. महज कुछ मिनट की एक जूम कॉल में सैकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का ऐलान हुआ और कॉरपोरेट जगत में नेतृत्व के तौर-तरीकों को लेकर बहस छिड़ गई. उस समय कुर्सी पर बैठे थे विशाल गर्ग, डिजिटल मॉर्गेज कंपनी Better Home & Finance के संस्थापक और सीईओ और अब इस कहानी का सबसे बड़ा मोड़ यह है कि जिस अधिकारी के एक फैसले ने 900 से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां खत्म कर दी थीं, आज वही अपनी कंपनी की कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है. Better Home & Finance के बोर्ड ने अगस्त 2026 में गर्ग को CEO पद से हटा दिया. उनकी जगह निवेशक डैनियल लुईस को अंतरिम CEO बनाया गया. कंपनी के बोर्ड ने गर्ग के नेतृत्व को लेकर उनके निर्णय, व्यवहार और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
दिसंबर 2021 में गर्ग ने कंपनी के कर्मचारियों के लिए एक वीडियो कॉल आयोजित की थी. इस कॉल में करीब 900 कर्मचारियों को बताया गया कि उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही हैं. घटना इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि यह फैसला छुट्टियों के मौसम से ठीक पहले लिया गया था और कर्मचारियों को यह सूचना आमने-सामने की बातचीत के बजाय एक सामूहिक वीडियो कॉल के जरिए मिली. घटना का वीडियो और उससे जुड़े विवरण सोशल मीडिया पर तेजी से फैले. गर्ग की कार्यशैली पर सवाल उठे और कंपनी को भारी सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा. बाद में गर्ग ने अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी और कुछ समय के लिए कंपनी से दूर रहे, लेकिन जनवरी 2022 में CEO के तौर पर वापस लौट आए लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ.
900 कर्मचारियों की छंटनी के कुछ महीनों बाद कंपनी ने एक और बड़ा कदम उठाया. मार्च 2022 में करीब 3,000 और कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की गई. इसके बाद भी कंपनी में कर्मचारियों की संख्या घटाने का सिलसिला जारी रहा. यानी 2021 की वह जूम कॉल सिर्फ एक विवादित घटना नहीं थी, बल्कि कंपनी के भीतर चल रहे बड़े पुनर्गठन की शुरुआत का संकेत भी बनी.
अगस्त 2026 में हालात पूरी तरह बदल गए. Better के बोर्ड ने गर्ग को CEO पद से बाहर कर दिया और डैनियल लुईस को अंतरिम CEO की जिम्मेदारी सौंप दी. बोर्ड के मुताबिक, गर्ग के कुछ फैसलों और कार्रवाइयों को लेकर उनके निर्णय, व्यवहार और विश्वसनीयता पर गंभीर चिंताएं पैदा हुई थीं. कंपनी ने बाद में यह भी कहा कि बोर्ड के सदस्यों ने गर्ग को हटाने के पक्ष में मतदान किया, जबकि गर्ग खुद इस प्रक्रिया में शामिल नहीं थे. लेकिन गर्ग ने बोर्ड के फैसले को स्वीकार नहीं किया.
CEO पद से हटाए जाने के बाद गर्ग ने आरोप लगाया कि डैनियल लुईस ने उनका भरोसा जीता और फिर उनके खिलाफ बोर्ड के भीतर समर्थन जुटाया. गर्ग का दावा है कि लुईस पहले कंपनी की रणनीति की सार्वजनिक रूप से तारीफ करते थे और बाद में बोर्ड में शामिल होने के बाद उन्हें ही बाहर करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. गर्ग ने लुईस पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है. यानी अब लड़ाई सिर्फ CEO की कुर्सी की नहीं है. यह कंपनी के नियंत्रण और बोर्ड की दिशा को लेकर भी संघर्ष बन गई है.
गर्ग ने अपनी वापसी की कोशिश को और असाधारण बना दिया है. रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कंपनी में वापस CEO के रूप में काम करने के लिए महज एक डॉलर सालाना वेतन पर काम करने की पेशकश तक की है. उनका तर्क है कि वह कंपनी को फिर से मुनाफे की राह पर ला सकते हैं. उन्होंने अपनी वापसी के लिए शेयरधारकों का समर्थन जुटाने की कोशिश भी शुरू कर दी है और कानूनी रास्ता अपनाया है.
गर्ग की व्यक्तिगत लड़ाई के साथ-साथ उनकी कंपनी का सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है कोविड काल के दौरान कम ब्याज दरों के कारण मॉर्गेज कारोबार में जबरदस्त तेजी आई थी. Better की वैल्यूएशन अरबों डॉलर तक पहुंची. लेकिन बाद में ब्याज दरों में बदलाव और मॉर्गेज बाजार में गिरावट का असर कंपनी पर पड़ा कंपनी के शेयर और बाजार मूल्य में भी भारी गिरावट आई. 2023 में SPAC के जरिए सार्वजनिक बाजार में आने के बाद कंपनी के शेयर में तेज गिरावट देखी गई.
2021 में विशाल गर्ग कंपनी के शीर्ष पर थे और उनके एक फैसले ने सैकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया था. उस समय सवाल कर्मचारियों के सामने खड़े भविष्य का था.
जिस CEO की पहचान एक समय आक्रामक फैसले लेने वाले कारोबारी के तौर पर बनी थी, अब वही बोर्ड के फैसले को चुनौती दे रहा है. वह अपनी कुर्सी वापस पाने के लिए शेयरधारकों का समर्थन तलाश रहा है और कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. कॉरपोरेट दुनिया में इसे समय का सबसे बड़ा उलटफेर कहा जा सकता है जिसने एक वीडियो कॉल में सैकड़ों कर्मचारियों के करियर पर फैसला सुनाया था, आज उसकी अपनी पेशेवर किस्मत एक बोर्डरूम के फैसले पर टिकी है और विशाल गर्ग की कहानी का अगला अध्याय अभी खत्म नहीं हुआ है. अगर शेयरधारकों के बीच उनकी मुहिम सफल होती है तो वह फिर उसी कंपनी की कमान मांग सकते हैं, जिसने उन्हें CEO पद से हटा दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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