West Bengal CAG Report Controversy: पश्चिम बंगाल की सियासत से इस समय की सबसे सनसनीखेज और राजनीतिक गलियारों को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के शासनकाल के दौरान हुए खर्चों और कथित व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर ममता बनर्जी सरकार की मुश्किलें बेहद बढ़ने वाली हैं.
राज्य में आई नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार चल रहे बजट सत्र के दौरान पिछले चार सालों की लंबित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वो गोपनीय रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखने की तैयारी में है, जिसने ₹2.29 लाख करोड़ के हिसाब-किताब पर बहुत बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है.
इस पूरे राजनीतिक भूचाल की जड़ें पिछली टीएमसी सरकार के कार्यकाल से जुड़ी हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश की गई सीएजी की आखिरी रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2020-21 की थी. इसके बाद, ममता सरकार ने तत्कालीन राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के बार-बार दिए गए कड़े निर्देशों और अल्टीमेटम के बावजूद 2021-22, 2022-23, 2023-24 और 2024-25 वित्तीय वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट को विधानसभा में पेश ही नहीं होने दिया. नियम के मुताबिक, जब तक यह रिपोर्ट सदन के पटल पर नहीं रखी जाती, तब तक यह सार्वजनिक नहीं हो सकती.
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राज्य के वित्त विभाग के एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. अधिकारी के मुताबिक, ‘सीएजी की इन आगामी रिपोर्टों में टीएमसी सरकार के समय हुए कई बड़े वित्तीय घोटालों और गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया गया है. स्वाभाविक रूप से, तत्कालीन राज्य सरकार सीएजी की इन रिपोर्टों के कड़वे सच से खुश नहीं थी और इसीलिए इन्हें जानबूझकर दबाकर रखा गया ताकि सच जनता के सामने न आ सके.
बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस बार के बजट सत्र में जैसे ही ये चारों रिपोर्ट सदन में टेबल की जाएंगी, वैसे ही टीएमसी के 15 साल के कथित ‘भ्रष्टाचार के साम्राज्य’ की पोल पूरी दुनिया के सामने खुल जाएगी. गायब हुए ₹2.29 लाख करोड़ का यह मुद्दा सीधे जनता की जेब और सूबे के विकास से जुड़ा है, जिससे ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए इस कूटनीतिक चक्रव्यूह से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाएगा. बंगाल की सड़कों से लेकर विधानसभा तक अब इस मुद्दे पर एक बड़ा ‘खेला’ होना पूरी तरह तय है.
-भारत एक्सप्रेस
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