अखिलेश यादव
Akhilesh Yadav On SIR And RJD Song: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू हुए SIR को लेकर देशभर में बहुत हल्ला हुआ. तमाम विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ बयान दिए और चुनाव आयोग समेत मोदी सरकार को निशाने पर लेते रहे. लालू यादव, ममता बनर्जी से लेकर अखिलेश यादव तक इसे वोट चोरी का एजेंडा बताते रहे. हालांकि, अब कुछ दलों के राग बदल रहे हैं. वहीं कई दल इसी ढर्रे पर आगे बढ़ रहे हैं. इस बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भी सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं. वो खुद SIR के प्रचार में लग गए हैं. वहीं उन्हें बिहार वाला डर भी सताने लगा है.
बिहार चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सजग हो गई है. अखिलेश यादव ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की इस दौरान उन्होंने RJD के गाने का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यहां बिहार जैसे गाने मत बना देना. इतना ही नहीं उन्होंने पत्रकारों से भी अपील की कि भाई किसी भी गाने को हमारी पार्टी से मत जोड़ देना. उन्होंने कहा-
‘मैं अपने कलाकारों से कहूंगा कोई ऐसा बिहार वाला गाना मत बना देना और हम अपने प्रेस के साथियों से कहेंगे कि कोई गाना कैसा बनाए हमारा मत बता देना एआई जमाना है, तुरंत बन जाता है गाना.’
बता दें बिहार में राजद के समर्थन में गाने बनाए गए थे. इसमें दबंगई जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. इन गानों के आने के बाद बिहार में सियासत जमकर गरमाई और चुनाव जंगलराज बनाम सुशासन हो गया था. पीएम मोदी से लेकर तमान NDA नेताओं ने इस मुद्दे को जमकर उठाया. परिणाम ये हुआ कि महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा.
अखिलेश यादव एक समय पर SIR के धुर विरोधी थे. अभी वो इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि, अब वह इसका प्रचार भी कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी ने हर निर्वाचन क्षेत्र में PDA के SIR प्रहरी अभियान चला रहे हैं. इसे उन्होंने मतदाता सूची में हो रहे सुधार पर नजर रखने के लिए कहा है. खुद अखिलेश ने सोशल मीडिया के जरिए इस संबंध में पोस्ट किया है.
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पहले विपक्ष SIR को सरकार की ‘वोट चोरी रणनीति’ बताकर हमला कर रहा था. वहीं अखिलेश यादव का SIR को लेकर नरम पड़ना और खुद इसके प्रचार में लग जाना बताता है कि बिहार चुनाव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी नई दिशा दी है. सपा अब SIR को मौके की तरह पेश कर रही है और अखिलेश यादव कलाकारों को ‘बिहार जैसा गाना मत बनाना’ कहकर यह साफ कर रहे हैं कि वे किसी भी विवादित नैरेटिव से दूरी रखना चाहते हैं. आने वाले चुनावों में SIR राजनीतिक हथियार बनेगा या सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया यह आने वाला समय तय करेगा.
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