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West Bengal Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव 2026 में प्रचंड जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खेमे में जश्न का माहौल है. दोनों ही राज्यों में पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया है. लेकिन, अब सियासी गलियारों में एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि आखिर असम से पहले पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण समारोह क्यों आयोजित किया जा रहा है? जबकि, असम में बीजेपी पहले से सत्ता में है और वहां नई सरकार का गठन महज एक ‘औपचारिकता’ और निरंतरता का हिस्सा है.
पार्टी आलाकमान ने असम को होल्ड पर रखकर पश्चिम बंगाल में 9 मई को शपथ ग्रहण का ऐलान कर दिया है. इसके पीछे बीजेपी की एक बेहद सोची-समझी सांस्कृतिक और राजनीतिक रणनीति छिपी है. आइए समझते हैं कि आखिर 9 तारीख और बंगाल की प्राथमिकता के पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या है.
बीजेपी के लिए 9 मई की तारीख सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक मास्टरस्ट्रोक है. बंगाली पंचांग के अनुसार, 9 मई को महान कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती (Rabindra Jayanti) मनाई जाती है.
‘बाहरी’ के टैग का जवाब: पूरे चुनाव के दौरान टीएमसी (TMC) ने बीजेपी पर ‘बाहरी’ पार्टी होने का आरोप लगाया था. टैगोर की जयंती के दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण करवाकर बीजेपी यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि वह बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ‘बंगाली अस्मिता’ और गुरुदेव के आदर्शों का पूरा सम्मान करती है.
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव: अपनी पहली सरकार की शुरुआत इस पावन दिन पर करके बीजेपी बंगाल के भद्रलोक (बुद्धिजीवी वर्ग) और आम जनता के दिलों में अपनी गहरी पैठ बनाना चाहती है.
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बीजेपी के लिए असम की जीत एक बरकरार रखा गया किला है, जबकि पश्चिम बंगाल की जीत एक ‘ऐतिहासिक विजय’ है. बंगाल बीजेपी के वैचारिक संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि है. यहां पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनना आरएसएस (RSS) और बीजेपी के लिए दशकों पुराने सपने के सच होने जैसा है.
पार्टी इस जीत को पूरे देश में एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर पेश करना चाहती है. इसलिए, असम के सहज सत्ता हस्तांतरण से पहले बंगाल के ऐतिहासिक पल को भव्यता के साथ दुनिया के सामने रखा जा रहा है.
बंगाल में चुनाव के बाद अक्सर सियासी हिंसा का इतिहास रहा है. बीजेपी आलाकमान अच्छी तरह जानता है कि टीएमसी के 15 साल के शासन के अंत के बाद राज्य में प्रशासनिक स्तर पर एक मजबूत संदेश देना जरूरी है. जल्द से जल्द शपथ ग्रहण करवाकर पार्टी प्रशासन और पुलिस महकमे पर तुरंत अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, ताकि किसी भी तरह की पोस्ट-पोल अस्थिरता (Post-poll violence) को रोका जा सके.
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दोनों राज्यों में चुनाव भले एक साथ हुए हैं लेकिन दोनों विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग समय पर हो रहा है. 7 मई 2026 को पश्चिम बंगाव विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रही है. वहीं दूसरी ओर असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को समाप्त हो रही है. जाहिर है असम में सरकार गठन के लिए पार्टी के पास ज्यादा समय है. इस कारण भी बंगाल में असम से पहले सरकार को गठन हो रहा है.
पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कार्यशैली हमेशा प्रतीकों और टाइमिंग पर निर्भर करती है. अमित शाह ने बंगाल के नेताओं को दिल्ली आने से रोककर साफ कर दिया था कि बंगाल के फैसले बंगाल की धरती पर ही होंगे. 9 तारीख को भव्य शपथ ग्रहण यह साबित करता है कि बीजेपी पूर्वोत्तर (असम) से ज्यादा फोकस अब पूर्वी भारत (बंगाल) के इस नए राजनीतिक केंद्र पर कर रही है.
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कुल मिलाकर, असम से पहले बंगाल में शपथ ग्रहण सिर्फ एक तारीख का चुनाव नहीं है, बल्कि यह ‘सोनार बांग्ला’ की दिशा में बीजेपी का पहला मजबूत और सांस्कृतिक रूप से सधा हुआ कदम है. क्योंकि, बीजेपी बंगाल में यह संदेश देना चाहती है कि वह अब बंगाल को छोड़ने नहीं वाली है.
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