डिजिटल अरेस्ट स्कैम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह चुकाने वाला है, पीड़िताओं से लगभग 3000 करोड़ रुपए अभी तक वसूला जा चुका है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अगर हम सख्त और कठोर आदेश नहीं देंगे तो समस्या और बढ़ जाएगी, हम इससे सख्ती से निपटेंगे.
कोर्ट ने मामले में सहायता करने के लिए वरिष्ठ वकील एन एस नाप्पिनै फर्स्ट को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि गृह मंत्रालय की एक अलग इकाई मामले को देख रही है और इसको लेकर कई कदम उठाये जा रहे हैं. इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह चौकाने वाला है कि पीड़ितों से लगभग 3000 करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं और यह सब हमारे देश में ही हो रहा है.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हमारे हिसाब से पैन इंडिया सीबीआई डिजिटल अरेस्ट के मामलों में मंजिल तक पहुच सकती हैं. मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया था कि अपराध की गंभीरता और प्रकृति को देखते हुए, उन्हें जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों की तादाद के हिसाब से जांच करने में सीबीआई सक्षम है.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई, केंद्र सरकार साइबर क्राइम अंबाला, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा था कि लोगों की जीवन भर की बचत से ठगी करने वाले बड़े सिंडिकेट का पता लगाने की जरूरत बताई है. कोर्ट ने कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट में विभिन्न फर्जी कार्यवाहियों और सीबीआई, ईडी जांच के झूठे दावे सामने आए है. दस्तावेजों की जालसाजी और इस अदालत तथा हाई कोर्ट के नाम, मुहर और न्यायिक प्राधिकरण का बेशर्मी से आपराधिक दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है.
कोर्ट ने कहा था कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों वाले न्यायिक आदेश न्यायपालिका पर जन विश्वास प्रणाली की नींव पर प्रहार करते हैं. कोर्ट ने कहा था कि यह मामला कोई अकेला मामला नही है. उन्होंने कहा था कि मीडिया में इस तरह की खबरे कई बार छपी है. सुप्रीम कोर्ट ने अंबाला में बुजुर्ग महिला से फर्जी आदेश दिखाकर 1करोड़ 5 लाख रुपये की ठगी की बात सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया था. दरअसल सितंबर में हरियाणा रोडवेज विभाग की रिटायर्ड ऑडिटर शशिबाला सचदेवा और उनके पति से फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपये की ठगी कर ली थी.
इतना ही नहीं पीड़ित महिला और उनके पति को 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था. उस दौरान मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने तक कि धमकी दी गई. जिसकी शिकायत पीड़िता ने पुलिस से की थी, उन्होंने पुलिस को बताया था कि 3 सितंबर को उनके.व्हाट्सएप नंबर पर एक महिला ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी से बताते हुए संपर्क किया और कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आ रहा है. जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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