समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अब्दुल्ला आजम की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि दर्ज एफआईआर को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता हैं और जांच/प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान की ओर से दायर एक अन्य याचिका को खारिज कर दिया था. वह मामला फर्जी पैन कार्ड और फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के इस्तेमाल से जुड़ा था. उस समय कोर्ट ने कहा था कि चूंकि उस मामले में ट्रायल पूरा हो चुका है, इसलिए अब एफआईआर या कार्यवाही रद्द नहीं कि जा सकती.
अब्दुल्ला आजम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद निचली अदालत के एमपी/एमएलए कोर्ट में मुकदमे में सुनवाई शुरू हो जाएगी. अब्दुल्ला आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो अलग-अलग मामलों में याचिकाएं दाखिल की थी.
दोनों ही मामलों में अब्दुल्ला आजम खान ने याचिकाएं दाखिल कर रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे ट्रायल को रद्द करने की मांग की थी. गलत जन्मतिथि पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 30 जुलाई 2019 को अब्दुल्ला आजम के खिलाफ गलत दस्तवेज़ों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का मुकदमा रामपुर के सिविल लाइन थाने में आईपीसी की धारा 468, 420, 471, 467 और भारतीय पासपोर्ट अधिनियम 1920 की धारा 12 (1) (A) के तहत मुकदमा दर्ज कराया था. अब्दुल्ला आजम पर गलत दस्तवेज़ों से पासपोर्ट बनवाने का आरोप है.
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आरोप है कि अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक प्रमाण पत्र और पासपोर्ट विभाग को दी गई जानकारी अलग-अलग है. शिकायतकर्ता के अनुसार अब्दुल्ला आजम को 10 जनवरी 2018 को पासपोर्ट संख्या जेड 4307442 जारी हुआ था. पासपोर्ट में अब्दुल्ला आजम की जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 बताई गई है. जबकि शैक्षिक प्रमाण पत्रों में जन्मतिथि जनवरी 1993 है.
दूसरे मामले में बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम खान और सपा नेता आजम खान के खिलाफ 6 दिसंबर 2019 को रामपुर के सिविल लाइन थाने में दो पैन कार्ड रखने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना का कहना था कि अब्दुल्ला आजम ने 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी शपथ पत्र में गलत पैन नंबर दर्ज किया था.
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