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एआईएमआईएम प्रमुख असुदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने की सुप्रीम कोर्ट से मांग की

एआईएमआईएम प्रमुख असुदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. सीजेआई बी आर गवई, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि मामले को सूचीबद्ध करने का मतलब मंजूरी देना नही है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने कहा कि कानून को छह महीने का समय दिया गया था, जिसमें से पांच महीने फैसला आने में बीत गया है, अब सिर्फ एक महीना बचा है.

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ओवैसी की ओर से दायर याचिका पर आपत्ति जताई. जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि सूचीबद्ध करने का मतलब मंजूरी देना या याचिकाकर्ता को राहत देना नही है. वही मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि उम्रे दराज मांग के लाए थे चार दिन. दो आरजू में गुजर गए, दो इंतजार में. मुस्लिम संगठनों ने इस नए वक्फ संशोधन कानून 2025 का विरोध किया है.

धार्मिक समुदायों ने कानून को अस्वीकार किया

इस कानून की विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों और सिख व ईसाई समुदाय समेत अन्य अल्पसंख्यकों द्वारा भी आलोचना की गई है. इसको लेकर मौलाना रहमानी ने कहा कि इस कानून को न केवल मुस्लिम संगठनों, बल्कि विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों, सिख, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने भी अस्वीकार किया हैं इसके बावजूद सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की योजना को बोर्ड ने गैरकानूनी करार दिया है. उन्होंने इसे संविधान के खिलाफ और सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन मामले की अवमानना बताया है.

बता दें कि वक्फ संशोधन एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई है. जिसपर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख रखा है. सुप्रीम कोर्ट तय करने वाला है कि सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन कानून 2025 पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि इस कानून में मौजूद विवादित प्रावधानों को तब तक लागू नहीं किया जाएगा, जबतक इसपर कोई फैसला नहीं आ जाता.

दरअसल सरकार द्वारा लाया लॉन्च किया जा रहा वक्फ उम्मीद पोर्टल केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल पहल है. जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का केंद्रीकृत पंजीकरण और प्रबंधन करना है. सरकार के दावा है कि यह पोर्टल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और अवैध कब्जे को रोकेगा.

ये भी पढ़ें: दिवंगत करोबारी संजय कपूर की ₹30 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद से संबंधित मामले में 13 अक्टूबर को सुनवाई

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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