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उपभोक्ता आयोगों में खाली पदों पर CJI सूर्यकांत सख्त, बोले- क्या ये सिर्फ रिटायर्ड जजों के पुनर्वास केंद्र बन गए हैं?

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में खाली पद और बढ़ते मुकदमों को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने एक बार फिर चिंता जाहिर की है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने देश के सभी राज्यों से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हर राज्य में हालात अलग-अलग हैं. सीजेआई ने रजिस्ट्री से स्टेट्स रिपोर्ट की सॉफ्ट कॉपी सभी राज्यों की ओर से पेश होने वाले वकीलों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. सीजेआई ने सभी राज्यों को 3 सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सबसे पहले संस्थागत मुद्दों पर ध्यान देना और उनका जवाब देना जरूरी है. मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंक्टरमणी ने कहा कि एनसीडीआरसी के प्रेसिडेंट ने हमारी बातचीत के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है. इसपर सीजेआई ने कहा कि इस रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से लंबित मामलों को कम करने के लिए क्षेत्रीय और सर्किट बेंच स्थापित करने पर विचार करने को कहा था.

जिला से राष्ट्रीय स्तर तक आयोगों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिला उपभोक्ता आयोग से लेकर राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग तक मामलों की सुनवाई और निपटारे की रफ्तार बेहद धीमी है. अभी सदस्यों के वेतन भत्ते तय है. अगर उनके भुगतान को मामलों के निपटारे के आधार पर निर्धारित किया जाए, तो मुकदमों के निपटारे की रफ्तार कई गुन्ना बढ़ जाएगी. कोर्ट ने कहा था कि जानकारी में.सबसे पुराने मामले का भी जिक्र होना चाहिए. लंबित मामलों के चार्ट में.साल-दर-साल लंबित मामलों की जानकारी भी होनी चाहिए.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर किसी उपभोक्ता को अपनी शिकायत की सुनवाई के लिए चार-चार साल तक इंतजार करना पड़ता है, फिर ऐसे आयोग के गठन का मकसद क्या रह जाता है. सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा था कि अगर रिटायर्ड जजों को इन आयोगों में नियुक्त किया जाता है और उनके काम का कोई प्रभावी प्रदर्शन मूल्यांकन नहीं होता, तो क्या ये आयोग कहीं रिटायर्ड जजों के पुनर्वास केंद्र तो नहीं बन रहे हैं?

बता दें कि एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों में अध्यक्ष और सदस्यों के आधे से अधिक पद खाली हैं. अध्यक्ष के करीब 50 प्रतिशत और सदस्यों के लगभग 40 प्रतिशत पद खाली है.

ये भी पढ़ें: ‘आप लोकतांत्रिक रूप से चुने गए चेयरमैन नहीं, सिर्फ प्रो-टेम चेयरपर्सन’; BCI प्रमुख पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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