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छात्रों की आवाज पर ताला नहीं! दिल्ली हाई कोर्ट ने DU प्रशासन और पुलिस को थमाया नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने संबंधी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों, रैलियों और जुलूसों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि यदि कानून और व्यवस्था का कोई उल्लंघन होता है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध सही नही हो सकता है.

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों और कर्मचारियों को यह चेतावनी दी थी कि वे इस विषय से संबंधित सामग्री सोशल मीडिया पर साझा न करें. वही दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि यह प्रतिबंध अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस प्रकार का संपूर्ण प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करता है.

छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ को जारी किया गया सख्त निर्देश

दायर याचिका में 17 फरवरी 2026 को प्रॉक्टर कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है. दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में सार्वजनिक मीटिंग, जुलूस, धरना, प्रदर्शन और प्रोटेस्ट जैसी गतिविधियों पर 17 फरवरी 2026 से एक महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया था. विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर मनोज कुमार द्वारा जारी आदेश में विद्यार्थियों, फैकल्टी और स्टाफ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध अवधि में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा.

भदौरिया ने किरोड़ी मल कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज द्वारा जारी अधिसूचना को भी चुनौती दी है. जिनमें प्रतिबंध को और सख्ती से लागू किया गया.

छात्र संगठनों ने प्रतिबंध को बताया अनुचित

याचिका में कहा गया है कि वर्तमान स्थिति के कारण बताते हुए दयाल सिंह इवनिंग कॉलेज का वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “रजनीगंधा 2026” स्थगित कर दिया गया है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि विवादित अधिसूचना परिसर में शांतिपूर्ण सभा, अभिव्यक्ति और भाषण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 ₹1)(a)(b) और (d) द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है. प्रॉक्टर ने कहा कि पिछले कुछ दिनों. में ऐसे इवेंट्स कंट्रोल से बाहर हो गए थे, इसलिए ये कदम उठाया गया है.

प्रॉक्टर ने कहा कि ये फैसला 13 फरवरी को नार्थ कैंपस पर हुई हिंसा को दोहराने से रोकने के लिए है. वो घटना यूजीसी 2026 पर प्रोटेस्ट के दौरान हुई थी.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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