लीगल

निजी स्कूलों को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत: अब फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं

 Delhi High Court Order: फीस बढ़ोतरी के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से निजी स्कूलों को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए उन्हें शिक्षा निदेशालय से पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं है.

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने अपने फैसले में कहा कि स्कूलों की स्वायत्तता (आजादी ) से जुड़े तय कानूनी नियमों का पालन करने से डीओई का लगातार इंकार, कानून के प्रति उसकी जान बूझकर की गई अनदेखी को दिखाता है.

निदेशालय के पास अब भी छह अधिकार सुरक्षित

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट अनएडेड स्कूलों को अपने वित्तीय मामलों और मैनेजमेंट को चलाने की पूरी स्वायत्तता है. शिक्षा निदेशालय का काम स्कूलों के रोजमर्रा के कामकाज या फीस निर्धारण में दखल देना नहीं है. हालांकि की कोर्ट ने स्पष्ट किया गया इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि स्कूल मनमानी लूट मचाए. शिक्षा निदेशालय के पास अब भी छह अधिकार सुरक्षित है कि वह चेक कर सके कि कहीं स्कूल नाजायज मुनाफाखोरी तो नहीं कर रहे है.

10 दिनों के अंदर पूरा करने संभव नहीं

साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा है कि स्कूल को कैपिटेंशन फीस (डोनेशन) लेने या व्यावसायिक मुनाफाखोरी करने की इजाजत नहीं होगी और ऐसा पाए जाने पर शिक्षा निदेशालय बाद में उन पर कार्रवाई कर सकता है. दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) सोसायटी ने दायर याचिका में कहा था कि स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी बनाना एक बड़ा काम है और इसे एक अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए 10 दिनों के अंदर पूरा करने संभव नहीं है.

एक फरवरी को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा था कि एसएलएफआरसी के लिए पांच अभिभावकों का चुनाव कैंपस में पब्लिक ड्रा के जरिये किया जाना है और इसे जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता है. दिल्ली सरकार द्वारा एक फरवरी को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की गई थी. यह अधिसूचना में विद्यालयों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी का गठन करने के लिए कहा गया था.

व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकना

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी राजू ने दलील देते हुए कहा था कि दिल्ली सरकार द्वारा तय की गई तिथियां ना तो अपरिवर्तनीय है और न ही इसकी बुनियादी संरचना का हिस्सा हैं. इसलिए इन समय सीमाओं का अदालत मामूली फेरबदल करता है तो यह स्वीकार होगा.

एएसजी राजू ने कोर्ट को बताया था कि दिल्ली सरकार द्वारा लाए गए अधिनियम का मुख्य उद्देश्य व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकना है और अधिसूचना इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए लाई गई है.

यह भी पढ़ें: SC का बड़ा फैसला: लापता बच्चों की तलाश के लिए बनेगा स्पेशल पोर्टल, FIR अनिवार्य

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

भोपाल में लगेगी 5 दिवसीय हाई-टेक प्रदर्शनी, अमित शाह करेंगे उद्घाटन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को भोपाल में नए आपराधिक कानूनों पर आधारित…

4 minutes ago

युवक ने सवाल पूछा तो मंत्री जी ने जड़ दिया थप्पड़? AAP ने दर्ज कराई FIR

दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा पर आम आदमी पार्टी ने गंभीर आरोप लगाए हैं. AAP…

17 minutes ago

7 अक्टूबर की दरिंदगी का हिसाब! नोआ अर्गमनी को बाइक पर अगवा कर भागने वाला हमास आतंकी गाजा में ढेर

इजरायली सेना ने गाजा के नुसेरात में बड़ा एक्शन लेते हुए 7 अक्टूबर हमले के…

54 minutes ago

आंवले से बदली किस्मत! ‘मन की बात’ में पीएम मोदी बोले- वोकल फॉर लोकल की मिसाल है प्रतापगढ़

PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो…

1 hour ago