दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगे में एक बड़ी साजिश रचने के मामले में नामजद आरोपी अतहर खान और मंसूर असगर पीरभॉय की ओर से दायर नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया है. गौरतलब है कि मंसूर असगर पीरभॉय पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के मीडिया सेल का प्रमुख होने और देश में हुए कई धमाकों की जिम्मेदारी लेने वाले ईमेल भेजने का गंभीर आरोप है.
हाई कोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि आरोपियों को इस स्तर पर रिहा किया जाता है, तो उनके फरार होने का बड़ा जोखिम हो सकता है. इसके साथ ही आरोपी बाहर आकर मामले के महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावित भी कर सकते हैं. इन्हीं ठोस आधारों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने निचली अदालत के पूर्व के फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है.
इससे पहले दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने भी अतहर खान, ताहिर हुसैन और मंसूर असगर पीरभॉय की ओर से दायर जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया था. निचली अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित अन्य आरोपियों की जमानत का पुरजोर विरोध किया था.
सुनवाई के दौरान तीनों आरोपियों ने इसी मुख्य मामले में सुप्रीम कोर्ट से 5 अन्य सह-आरोपियों को मिली जमानत की नजीर (मिसाल) पेश करते हुए अपने लिए भी समानता के आधार पर जमानत की मांग की थी. लेकिन हाई कोर्ट की बेंच ने उनकी इन दलीलों को अमान्य करते हुए खारिज कर दिया. बता दें कि इन तीनों आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. मुख्य आरोपियों में से एक ताहिर हुसैन दिल्ली दंगों के आरोप में पिछले 4 साल 9 महीने से जेल में बंद है. इससे पहले, सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने इसी मामले में शरजील इमाम और उमर खालिद को छोड़कर गुलफिशा फातिमा सहित पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी थी.
वहीं, निचली अदालत में दाखिल की गई तीसरी सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट पर संज्ञान लेने के दौरान बचाव पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई थी कि कोर्ट द्वारा कानूनी संज्ञान (Cognizance) लेने से पहले ही चार्जशीट मीडिया में लीक हो जा रही है. इस पर कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए कहा था कि अदालत के संज्ञान लेने से पहले चार्जशीट का लीक होना एक परेशान करने वाला और चिंताजनक ट्रेंड है.
ये भी पढ़ें: दिल्ली हाई कोर्ट से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को बड़ी राहत, X अकाउंट बहाल करने का दिया निर्देश
अदालत ने टिप्पणी की थी कि मुख्यधारा के मीडिया की रिपोर्टिंग और खासकर सोशल मीडिया पर हमेशा इसको लेकर गैर-जरूरी चर्चा होती रहती है. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मीडिया खबरों को कवर करने और रिपोर्टिंग के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, लेकिन उन्हें संवेदनशील मामलों में अपने रुख को लेकर बेहद सावधान और जिम्मेदार रहना चाहिए.
ये सभी हैं दिल्ली दंगा ‘बड़ी साजिश’ मामले के मुख्य आरोपी
बता दें कि दिल्ली दंगे की इस बड़ी साजिश वाले मुख्य मामले (FIR 59/2020) में ताहिर हुसैन, उमर खालिद, खालिद सैफी, इशरत जहां, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, आसिफ इकबाल तन्हा, शादाब अहमद, तसलीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान, अतहर खान, सफूरा जरगर, शरजील इमाम, फैजान खान और नताशा नरवाल भी प्रमुख रूप से आरोपी हैं.
शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे किया अपना…
Babar Azam Captaincy Controversy: वसीम अकरम ने बाबर आजम की कप्तानी पर सवाल उठाते हुए…
CSK New Head Coach: आईपीएल 2027 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने बड़ा बदलाव…
आजादी के समय हैदराबाद को भारत में मिलने से रोकने वाले रजाकार कौन थे? जानिए…
बिहार की राजनीति का जिक्र आते ही अक्सर बड़े-बड़े काफिले और सत्ता का रुआब आंखों…
Supreme Court Arrest Rules: क्या पुलिस आपको बिना कुछ लिखे गिरफ्तार कर सकती है? सुप्रीम…