सांकेतिक फोटो
दिल्ली हाईकोर्ट ने संरक्षित स्मारक अजमेरी गेट के आसपास अवैध एवं अनाधिकृत निर्माण को तोड़ने की मांग करने वाली जनिहत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि आसपास कई ऐसी अवैध निर्माण हो सकते हैं, लेकिन आपने सिर्फ तीन दुकानों को ही क्यों चुना.
पीठ ने इसके बाद कहा कि हम एमसीडी से आपकी संपत्ति का निरीक्षण करने और अवैध पाए जाने पर उसे तोड़ने के लिए कहेंगे. ऐसा लगता है कि आपने दुर्भावना से प्रेरित होकर याचिका दाखिल किया है. यह एक जनिहत याचिका है, यह अधिकार का मामला नहीं है. पीठ ने यह भी कहा कि ये निर्माण कब शुरू हुए. तब से आपने क्या किया. जबकि आप आसपास ही रहते हैं. आपने जनिहत याचिका दाखिल करने के अलावा और क्या किया है. क्या आपने जनिहत याचिका नियम देखे हैं?
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हम और क्या कर सकते हैं. हम गरीब हैं. नए निर्माण के लिए एमसीडी ने क्या किया है. इमारत की बुकिंग के बावजूद हमारी बात नहीं सुनी गई. पीठ ने कहा कि हमें प्रथम दृष्टया लगता है कि जनिहत याचिका दुर्भावना से प्रेरित है. यह दिखाने के लए भी कुछ सामग्री होनी चाहिए कि यह आपने बेहतरी के लिए दाखिल किया है. इस दशा में याचिका खारिज की जाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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