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दिल्ली पुलिस में तैनात हवलदार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की खबरें अन्याय की धारणा को देता है बढ़ावा

दिल्ली हाई कोर्ट(Delhi High Court) ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की खबरें अन्याय की धारणा को बढ़ावा देता है. निर्णयकर्ताओं को चाहे वे न्यायपालिका में हो या कार्यपालिका में इसे जड़ से उखाड़ने के लिए पूरी ताकत लगानी चाहिए. जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि उच्च पदस्थ व्यक्तियों के भ्रष्टाचार के कारण समाज में उत्पन्न अशांति व्यवस्था के प्रति निराशावाद को जन्म देती है. उससे शांतिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए बनाई गई न्यायिक प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ता है.

कोर्ट ने की टिप्पटी (Delhi High Court)

अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपी हवलदार की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए उसे रिहा करने से इनकार कर दिया है. हवलदार पर एक बदमाश को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे 60 हजार रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है. अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार शारीरिक अपराधों से कमतर नहीं है. बल्कि भ्रष्टाचार पूरे समाज के शरीर को गंभीर रूप से घायल करता है. इसलिए भ्रष्टाचार के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण केवल शून्य सहनशीलता का नही, बल्कि पूर्ण असहिष्णुता का होना चाहिए.

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कोर्ट ने दायर अग्रिम जमानत को किया खारिज

कोर्ट ने हवलदार की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी पूरी ईमानदारी और समपर्ण के साथ जोखिम उठाकर अथक परिश्रम करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार की छाया पुलिस व्यवस्था के कुछ हिस्सों को ग्रस्त करती रहती है, जिससे जनता तक विश्वास कम होता है. भ्रष्टाचार के मामलों में अग्रिम जमानत के मुद्दे पर विचार करते समय अदालत को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि निर्णय से समाज को भ्रष्टाचार के प्रति सहनशील कानूनी व्यवस्था का संदेश न मिले.

आरोपी एक पुलिस अधिकारी है- कोर्ट

भ्रष्टाचार के मामलों में सामान्य मानदंडों के आधार पर अग्रिम जमानत देना सुरक्षित नही होगा. आरोपी एक पुलिस अधिकारी है, जिसने इलाके के बदनाम लोगों को धमकाकर रिश्वत की मांग की और यह सुनिश्चित किया कि उक्त रकम सह आरोपी को सौंप दिया जाए जिससे वह न फंसे. उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज की जाती है.

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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