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15 दिन में खाली करना होगा परिसर! दिल्ली रेस क्लब को बड़ा झटका, पटियाला हाउस कोर्ट ने बेदखली के आदेश पर रोक लगाने से किया इनकार

दिल्ली रेस क्लब को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने सरकार द्वारा जारी बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने क्लब की उस उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 11 अगस्त 2026 के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी.

इस आदेश में दिल्ली रेस क्लब को लुटियंस दिल्ली स्थित अपना परिसर 15 दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया था. पटियाला हाउस कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज पीतांबर दत्त ने क्लब की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि क्लब प्रथम दृष्टया ऐसा कोई मामला स्थापित नहीं कर पाया है, जिसके आधार पर बेदखली आदेश पर रोक लगाई जा सके. इसके साथ ही कोर्ट ने अंतरिम राहत की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दी थी.

मामले की सुनवाई के दौरान क्लब की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सुहैल दत्त ने कहा कि एस्टेट अधिकारी ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया और क्लब को बार-बार मांग करने के बावजूद मामले से जुड़े दस्तवेज़ों की कॉपी नही दी गई. उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला पहले से तय मुद्दे को दोबारा उठाने जैसा है, क्योंकि 1999 में जारी एक पुराने कारण बताओ नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट रद्द कर चुका है. क्लब की ओर से दलील दी गई कि लगातार किराया देने और वर्ष 2013 में लीज एक्सटेंशन के लिए जमा राशि देने से लीज का नवीनीकरण माना जाना चाहिए.

जवाब दाखिल करने के लिए क्लब को मिले कई मौके

वही केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि क्लब की लीज 1994 के बाद कभी रिन्यू नही हुई. सरकार के मुताबिक इसके बाद क्लब महीने-दर-महीने के आधार पर परिसर में रह रहा था. सरकार ने यह भी कहा कि क्लब को सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे और जवाब दाखिल करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन क्लब ऐसा नही कर पाया. रिकॉर्ड के अनुसार कोर्ट ने पाया कि 27 अप्रैल 2026 की कार्यवाही में दर्ज था कि क्लब को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे. कोर्ट ने यह भी पाया कि कोर्ट के प्रतिनिधि ने उस आदेश पत्र पर बिना किसी आपत्ति के हस्ताक्षर किए थे.

दिल्ली रेस क्लब को अंतरिम राहत देने से कोर्ट का इनकार

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि लीज की अवधि खत्म होने के बाद केवल किराया देते रहने से लीज अपने आप मे रिन्यू नहीं हो जाती. इन तमाम तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि दिल्ली रेस क्लब अंतरिम राहत के लिए कोई मजबूत प्रथम दृष्टया मामला नहीं बना पाया और उसकी स्टे अर्जी खारिज कर दी. 1930 के आसपास जयपुर के तत्कालीन महाराजा ने यह जमीन दिल्ली पोलो क्लब को उपहार में दिया था.

24 फरवरी 1051 को केंद्रीय लोक निर्माण ने 20 साल के लिए इसे क्लब को औपचारिक रूप से लीज पर दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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