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51 जख्मों का खौफनाक मंजर… कड़कड़डूमा से मिली उम्रकैद के खिलाफ हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंचे ताहिर हुसैन

वर्ष 2020 दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ऑफिसर अंकित शर्मा मौत मामले में उम्रकैद की सजा पाए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है.

Edited by Shubhra Rai

वर्ष 2020 दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ऑफिसर अंकित शर्मा मौत मामले में उम्रकैद की सजा पाए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. हुसैन ने दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील दायर की है.

दो दिसंबर को अगली सुनवाई

इससे पहले इसी मामले में उम्रकैद की सजा पाए नाजिम और कासिम की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. नाजिम और कासिम ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है. कोर्ट दो दिसंबर को अगली सुनवाई करेगा. निचली अदालत ने अपने फैसले में स्प्ष्ट किया था, कि यह मामला जघन्यतम श्रेणी में नहीं आता है. इसलिए मौत की सजा नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन सहित पांच लोगों को दोषी करार दिया था.

दिल्ली पुलिस ने कहा- मौत की सजा दी जानी चाहिए

सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन सहित अन्य को फांसी की सजा देने की मांग की थी. स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कहा था कि ये लोग बर्बर है, यह लोग अपराध के समय कसाई बन गए थे. एसपीपी ने कहा था कि उन्हें जेल में रखा जाना चाहिए और मौत की सजा दी जानी चाहिए. दिल्ली पुलिस ने कहा था कि यह एक ऐसा केस है जहां अपराधी जानवर बन गए थे, अंकित के मरने के बाद भी उसको मारा गया, उसके शरीर पर निकर के अलावे कोई कपड़ा नहीं था, इनका अपराध ऐसा जिसको माफ नहीं किया जा सकता. इनको मौत की सजा दी जानी चाहिए. दिल्ली पुलिस ने कहा था कि अंकित शर्मा को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया. 51 जख्म थे, 7 जख्म ऐसे थे जिनसे मौत हो सकती थी, 16 जख्म धारदार अपराध से किए गए थे. जबकि ताहिर हुसैन की ओर से पेश वकील ने फांसी की सजा की मांग का विरोध किया था.

91 गवाहों के बयान कोर्ट ने दर्ज

उन्होंने कहा था कि हर केस में मौत की सजा देने का प्रावधान नहीं है. 91 गवाहों के बयान कोर्ट ने दर्ज किए, जिसके बाद 11 में से सिर्फ 5 लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था. हुसैन के वकील ने कहा कि पूरे ट्रायल के दौरान आपराधिक षड्यंत्र (आईपीसी की धारा 120B) का कोई भी साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं किया गया.

उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने हमला किया, उन्हें बरी कर दिया गया है. हुसैन के वकील ने कहा था कि पुलिस भी हिंसक भीड़ को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी, ऐसे में किसी एक व्यक्ति को हत्या का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. ताहिर हुसैन के वकील ने यह भी कहा था कि रेयर ऑफ दी रेयर केस में मौत की सजा दी जानी चाहिए, जहां पर अंकित शर्मा की हत्या हुई वहां पर ताहिर हुसैन मौजूद नहीं था, अंकित की हत्या की साजिश में ताहिर नहीं था.

हुसैन के वकील ने कहा था कि सिर्फ जख्मों के हिसाब से यह तय नहीं किया जा सकता कि दोषी को मौत की सजा दी जाए. कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को आईपीसी की धारा 302, 188,153 A, 147, 148, 149 और 365 के तहत दोषी करार दिया था. साथ ही कोर्ट ने आईपीसी की धारा 120B और 129 के तहत अपराधों से बरी कर दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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