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धार्मिक उत्सवों में अंतरधार्मिक सहभागिता संविधान के खिलाफ नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट से कर्नाटक सरकार को बड़ी राहत मिल गई है. राज्य सरकार के खिलाफ दायर याचिका में कोर्ट ने खारिज कर दिया है. दायर याचिका में बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को मैसूरु दशहरा उत्सव के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए जाने को चुनौती दी गई थी.

जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीबी सुरेश ने कोर्ट को बताया कि धार्मिक कार्यक्रम के उद्धघाटन और पूजा में गैर हिंदू की मौजूदगी से अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है.

बानू मुश्ताक उत्सव की करेंगी शुरुआत

इसपर जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि याचिका खारिज की जाती है. संविधान की प्रस्तावना को देखिए. मैसूरु जिला प्रशासन ने तीन सितंबर को आधिकारिक तौर पर बानू मुश्ताक को आमंत्रित किया था. कर्नाटक के हासन की रहने वाली 77 वर्षीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक 22 सितंबर 2025 को इस उत्सव की शुरुआत करेंगी. विजयदशमी कार्यक्रम 2 अक्टूबर को निर्धारित है.

इस फैसले का भाजपा और कुछ अन्य संगठनों ने विरोध किया है. कर्नाटक के मैसूर शहर में हर साल मनाया जाता है. यह राज्य का सबसे बड़ा सांस्कृतिक पर्व है, जिसे नाडा हब्बा यानी राज्य उत्सव भी कहा जाता है. ये उत्सव देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित होता है. मान्यता यह है कि उन्होंने राक्षस राजा महिषासुर का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाई थी.

उत्सव में 50 लाख लोग दशहरा मनाने आते

मामले में विवाद तब और बढ़ गया, जब बानू मुश्ताक का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कन्नड़ भाषा की देवी भुवनेश्वरी की पूजा को लेकर आपत्ति जताई थी. उनके बयान को कुछ लोगों ने हिंदू संस्कृति विरोधी बताया. बता दें कि दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में दुनिया भर से लगभग 50 लाख लोग कर्नाटक की विरासत राजधानी मैसूर में दशहरा मनाने आते है.

इसको लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि मैसूर दशहरा का उद्धघाटन करने के लिए बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने का विरोध केवल कुछ लोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों के साथ सभी हिंदू नहीं हैं.

ये भी पढ़ें: अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसा मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, डेटा सार्वजनिक करने की हुई मांग

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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