लीगल

Justice Yashwant Verma Case: जली हुई नकदी और इन-हाउस जांच रिपोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, 28 जुलाई को सुनवाई

Justice Yashwant Verma Case: जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर मिले जला हुआ कैश के मामले दायर याचिका पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच 28 जुलाई को सुनवाई करेगी. जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट पर आपत्ति जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. हालही में जस्टिस वर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल नेजल्द सुनवाई की मांग की थी.

जस्टिस वर्मा की ओर से पेश होने वाले वकीलों में कपिल सिब्बल के अलावे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी, वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा, वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल सहित अन्य वकील शामिल है. जस्टिस वर्मा द्वारा दायर याचिका में इन-हाउस-कमेटी की रिपोर्ट को अमान्य करार देने की मांग की है.

जांच समिति की रिपोर्ट को दी चुनौती

जस्टिस वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को 8 मई को दी गई सिफारिश को रद्द करने की मांग की है. जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिए बिना ही दोषी ठहराया गया है. उन्होंने कहा कि सीजेआई द्वारा गठित इन-हाउस-कमेटी के तीनों सदस्यों ने निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिए बिना ही अंतिम नतीजे पर पहुच गए.

जस्टिस वर्मा का मानना है कि कमेटी 14 मार्च को देखे गए कथित कैश से संबंधित तथ्यों को जांचने में विफल रही है. जबकि दोषसिद्धि के लिए यह आवश्यक है. जस्टिस वर्मा ने यह याचिका ऐसे समय पर दाखिल की है, जब संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और सरकार महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने वाली है. 55 गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और फायर ब्रिगेड स्टाफ के बयानों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के पैनल ने जस्टिस वर्मा और उनके परिवार को प्रत्यक्ष रूप से कैश रखने का जिम्मेदार ठहराया.

नकदी मिलने पर उठाए सवाल

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आग के बाद रातों-रात कैश को हटाया गया और जानबूझकर सबूत नष्ट किए गए थे. समिति ने बयान के अलावा वीडियो रिकॉर्डिंग भी किया, ताकि यह सुनिश्चित की जा सके कि इसे चुनौती न दी जा सके. समिति की 64 पेज की रिपोर्ट के अंत में दो पैराग्राफ हैं, जो यह निष्कर्ष निकालते हैं कि नकदी 30 तुगलक क्रिसेंट, नई दिल्ली के स्टोर रूम में पाई गई थी, जो आधिकारिक तौर पर जस्टिस वर्मा के कब्जे में था और यह स्टोर रूम तक पहुच जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों के गुप्त या सक्रिय नियंत्रण में पाई गई थी.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा 22 मार्च के पत्र में उठाए गए आरोपों में पर्याप्त तथ्य है और यह सही पाया गया है कदाचार इतना गंभीर है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता है. 14 मार्च को दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के बाहरी हिस्से में आग लगने की घटना के दौरान दमकल कर्मियों को बोरे में भरकर रखी गई जली हुई नकदी मिली थी.

ये भी पढ़ें: बालाकोट एयर स्ट्राइक के पायलट और पत्नी के वैवाहिक विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सलाह, माफ करो और आगे बढ़ो

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

मोदक-लड्डू नहीं, बप्पा को चढ़ाते हैं बोबा टी! थाईलैंड की ये गणेश पूजा क्यों है खास?

Ganesh Puja Thailand: थाईलैंड के बैंकॉक में गणेश जी की मूर्ति के सामने बोबा टी…

8 minutes ago

‘जाते-जाते और विकराल रूप लेगा मानसून!’ दिल्ली से UP तक 4 वेदर सिस्टम एक्टिव, जानें मौसम का हाल

IMD ने 16 सितंबर को दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत…

2 hours ago

Aaj Ka Rashifal: मिथुन और कन्या पर बरसेगा छप्परफाड़ पैसा! जानें सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा किन राशियों का भाग्य?

16 सितंबर 2026 को चंद्रमा के वृश्चिक राशि में गोचर और ज्योतिषीय योगों के बीच…

3 hours ago

PM मोदी के जन्मदिन से पहले भाजपा ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया, रैली में कवर होंगे 1,159 गांव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक सेवा काल को पूरा करने के अवसर…

10 hours ago