लीगल

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से किया इनकार

Justice Yashwant Verma: जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Verma) के सरकारी आवास पर मिले कथित कैश मिलने के मामले में वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई बी आर गवई ने याचिकककर्ता वरिष्ठ वकील नेदुम्परा से कहा कि याचिका को अभी खारिज करें या बाद में. कोर्ट ने यह टिप्पणी तब कि जब नेदुम्परा बार-बार कोर्ट से याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग कर रहे थे.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से क्या कहा? (Justice Yashwant Verma)

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि कोर्ट को यह न बताए कि कोर्ट को क्या आदेश पारित करना है. मेंशनिंग के दौरान नेदुम्परा ने कहा कि लगता है वर्मा भी अब यही चाहते हैं. उन्होंने भी आंदोलन किया है. एफआईआर होनी चाहिए. इसपर सीजेआई बी आर गवई ने कहा कि क्या वह आपके दोस्त हैं? आप उन्हें कैसे संबोधित कर रहे हैं? अदालत में थोड़ी मर्यादा रखिए. वह अभी भी न्यायाधीश है. जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता नेहस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह क्या हो रहा है? इससे पहले भी नेदुम्परा ने याचिका दायर कर कई बार एफआईआर की मांग कर चुके हैं. लेकिन सभी याचिकाओं को खारिज कर चुका है.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी गई जांच रिपोर्ट

पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय एस ओका ने नेदुम्परा से कहा था कि आप वेबसाइट देखिए, जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी गई है. यदि आप परमादेश रिट चाहते हैं तो आपको पहले उन अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा जिनके समक्ष मामला लंबित है. याचिकाकर्ता व वकील नेदुम्परा ने कहा था कि धारणा यह है कि रिश्वत दी जाती है. यह एक संज्ञेय अपराध है. दंड के प्रावधान सभी के लिए समान हैं. यदि कोई निर्णय बनाम क़ानून है तो क़ानून ही ऊपर माना जाएगा.

ये भी पढ़ें: Monsoon Session 2025: लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने शुरू की नारेबाजी, स्पीकर बोले- सदन चलाना सभी की जिम्मेदारी

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से दिल्ली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने की मांग की

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने और प्रभावी तथा सार्थक जांच करने का निर्देश देने की मांग की थीय याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से 22 मार्च को गठित तीन सदस्यीय न्यायाधीशों की समिति को जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना की जांच करने का कोई अधिकार नहीं हैय जबकि संसद या संविधान ने ऐसा करने का अधिकार नहीं दिया है.

याचिका में कहा गया था, जब अग्निशमन/पुलिस बल ने आग बुझाने के लिए अपनी सेवाएं दीं तो यह बीएनएस के विभिन्न प्रावधानों के तहत दंडनीय संज्ञेय अपराध बन गया और पुलिस का कर्तव्य है कि वह मुकदमा दर्ज करें. यह घटना भारतीय न्याय संहिता के तहत विभिन्न संज्ञेय अपराधों के दायरे में आती है. याचिका में यह भी कहा गया था कि के वीरास्वामी बनाम भारत संघ (1991)में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में यह निषिद्ध किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पूर्व अनुमति के बिना किसी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दर्ज नही किया जाएगा. याचिका में कहा गया था कि यह न्याय को बेचकर जमा किए गए काले धन का मामला है.

Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का आगाज: सीएम मोहन यादव और नितिन गडकरी 351 बसों को दिखाएंगे हरी झंडी

MP SUGAM PARIVAHAN SEVA LAUNCH: मध्य प्रदेश में सरकारी निगरानी वाली सुलभ और सुरक्षित यात्री…

3 hours ago

लापरवाही बनी काल! यमुना एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस में आग से 9 मौतें

ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग…

3 hours ago

दलबदल का खेल: चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों-विधायकों ने पार्टियां बदलीं — जानिए किस राज्य में हुआ सबसे बड़ा परिवर्तन

एडीआर ने नेशनल इलेक्शन वॉच के साथ लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए निर्वाचित…

3 hours ago

60 का दूल्हा, 23 की दुल्हन… तानों की परवाह किए बिना पिंकू संग वर्षा ने लिए सात फेरे

बिहार के लखीसराय में 60 साल के पिंकू सिंह ने 23 साल की वर्षा रानी…

3 hours ago

रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र से बनाई जाए राष्ट्रीय नीति

सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में राज्यों के बीच…

4 hours ago

चिता की आग और मोक्ष की नगरी, क्या आपने देखी है बनारस की इस दुनिया की असली तस्वीर?

बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच…

4 hours ago