लीगल

बुजुर्ग और बीमार कैदियों की रिहाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, नालसा ने दायर की जनहित याचिका

बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की रिहाई की मांग वाली याचिका पर जस्टिस विक्रमनाथ की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी. यह याचिका नालसा की ओर से दायर किया गया है. सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा कि पहले दिल्ली हाई कोर्ट क्यों नही गए. कोर्ट अगले सप्ताह इस मामले में सुनवाई कर सकता है. इसको लेकर नालसा ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है.

जिसमें बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की रिहाई की मांग की गई है. याचिका में दयापूर्ण रिहाई की मांग पर जोर दिया गया है. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा शुरू किए गए विशेष अभियान के तहत देश भर में बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार दोषियों की रिहाई की मांग की गई है. दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि न्याय प्रणाली गंभीर रूप से बीमार या बुजुर्ग कैदियों के साथ किस तरह पेश आती है, इसमें सुधार की तत्काल आवश्यकता है.

इसमें तर्क दिया गया है कि ऐसे व्यक्तियों को लगातार कैद में रखना, जिनमें से कई को पर्याप्त चिकित्सा देखभाल तक पहुच नही है, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उनके अधिकारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतो का उल्लंघन है. जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि नालसा के बुजुर्ग कैदियों और असाध्य रूप से बीमार कैदियों के लिए विशेष अभियान का समर्थन किया गया है, जिसे 10 दिसंबर 2024 (मानवाधिकार दिवस) को न्यायमूर्ति बीआर गवई के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था, जो नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष है.

25982 कैदियों को किया गया रिहा

इस अभियान का उद्देश्य ऐसे कैदियों की पहचान करना, कानूनी सहायता के माध्यम से उनकी रिहाई की सुविधा प्रदान करना और समाज में उनके पुनः एकीकरण का समर्थन करना है. बता दें कि दिल्ली, बिहार और जम्मू कश्मीर की जेलों में सजायाफ्ता की तुलना में विचाराधीन कैदियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है.

नालसा द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू कश्मीर की जेलों में कुल कैदियों कान97.5 फीसदी विचाराधीन कैदी है, जबकि दिल्ली में 88.5 फीसदी विचाराधीन कैदी है और बिहार में 86.5 फीसदी विचाराधीन कैदियों की संख्या है. रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में यूटीआरसी की सिफारिश पर देशभर की जेलों से 25982 विचाराधीन कैदियों को रिहा किया गया है जो कि जेलों में बंद कुल कैदियों के 5 फीसदी है. साथ ही कहा है कि 2019 की तुलना में 2024 में 108 फीसदी अधिक कैदियों को समिति की सिफारिश पर रिहा किया गया है.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने कन्नगी-मुरुगेशन ऑनर किलिंग मामले में दोषियों को राहत देने से किया इनकार, 8 दोषियों को उम्रकैद की सजा बरकरार

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

दिवाली पर कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में उमड़ती है भक्तों की भीड़, जानिए क्यों खास है मां अंबाबाई का दरबार?

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर, जिसे मां अंबाबाई के नाम से भी…

9 minutes ago

महंगाई का डबल अटैक: अक्टूबर मेंखुदरा महंगाई दर 5.93% पर पहुंची, आपकी EMI पर भी मंडराया खतरा

Delhi News: अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.93% और खाद्य महंगाई 8.20% तक पहुंचने…

10 minutes ago

दिवाली से पहले यूपी में कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, DA 63% हुआ; बोनस का भी मिलेगा फायदा

UP DA Hike: यूपी की योगी सरकार ने दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों को बड़ा…

31 minutes ago

छठ के बाद क्या टूट जाएगी JDU? संजय झा से तल्खी और बीजेपी का दफ्तर, जानिए क्या है ललन सिंह का अगला गेमप्लैन

Bihar Politics: ललन सिंह की पार्टी बैठकों से दूरी और विधायकों की गोलबंदी के बाद…

33 minutes ago

योगी बाबा के स्वागत में जगमगाएगा वनटांगिया गांव, 82.41 करोड़ की सौगात के साथ फिर मनाएंगे दीपोत्सव

गोरखपुर के वनटांगिया गांव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीपोत्सव मनाएंगे और 82.41 करोड़ रुपये की…

59 minutes ago

दिल्ली में अपना आशियाना बनाने का सुनहरा मौका: DDA लाया ‘खुशहाल परिवार योजना 2026’, नरेला में 25% की छूट

DDA Khushhaal Pariwaar Yojana: दिवाली से पहले DDA ने दिल्ली के नरेला, लोकनायकपुरम और जहांगीरपुरी…

1 hour ago