तमिलनाडु के बहुचर्चित कन्नगी-मुरुगेशन ऑनर किलिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 8 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. जिसके खिलाफ दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल किया था. जस्टिस सुधांशु धुलिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है.
दरअसल अंतरजातीय जोड़े एस मुरुगेसन और डी कन्नगी की नृशंस हत्या कर दी गई थी. परिवार के सदस्यों ने दोनों को जहर देकर मार दिया था. कन्नगी वन्नियार समुदाय (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) से थी, जबकि मुरुगेशन अनुसूचित जाति से संबंध रखते थे. दोनों की मुलाकात चिदंबरम के अन्नामलाई विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हुई थी.
विरोध के बावजूद दोनों ने 5 मई 2003 को कडलूर में गुप्त से विवाह पंजीकृत कराया था. मुरुगेसन केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक था और दलित समुदाय से था. कन्नगी एक वाणिज्य स्नातक थी और वन्नियार समुदाय से थी. पुलिस जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद मामले को सीबीआई के पास ट्रांसफर कर दिया गया था. 2021 में ट्रायल कोर्ट ने मरुदूपंडियन को मौत की सजा सुनाई थी. जबकि कन्नगी के भाई, और उसके पिता सहित 12 अन्य को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी.
2022 में मद्रास हाईकोर्ट ने मरुदुपंडियन की मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया था, और उसके पिता सहित 9 अन्य की उम्रकैद की सज़ा की पुष्टि की थी जबकि दो लोगों को बरी कर दिया था. जिसमें उसके पिता, एक पुलिस निरीक्षक थे और सेवानिवृत्त डीएसपी, जो तब निरीक्षक थे.
-भारत एक्सप्रेस
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