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आरएचएफएल और आरसीएफएल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट 9 जुलाई को लेगा ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान

राऊज एवेन्यु कोर्ट में रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर 9 जुलाई को सुनवाई करेगा. वही कोर्ट ने आरोपी अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना की न्यायिक हिरासत की अवधि को 15 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया है. ईडी ने यह चार्जशीट 55 लोगों के खिलाफ दायर की गई है.

दायर चार्जशीट में अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, अभिताभ झुनझुनवाला और अमित बापन्ना का नाम शामिल है. इन्हें ईडी ने अप्रैल 2026 में गिरफ्तार किया था. इन दोनों को आरएचएफएल और आरसीएफएल से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था. यह मामला पीएमएलए के तहत दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जिसकी नींव सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित है.

आरएचएफएल और आरसीएफएल की होल्डिंग कंपनी है रिलायंस कैपिटल

ईडी के मुताबिक दोनों आरोपियों को अपराध की आय को छिपाने और उसे वैध दिखाने में भूमिका निभाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. झुनझुनवाला मार्च 2003 से सितंबर 2019 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक थे, जो आरएचएफएल और आरसीएफएल की होल्डिंग कंपनी हैं. एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, रिलायंस एडीए ग्रुप ने साफ किया कि मिस्टर झुनझुनवाला और मिस्टर बापना दोनों का पिछले सात सालों से ग्रुप से कोई लेना-देना है. इसमें कहा गया है, मीडिया के सवालों के आधार पर रिलायंस ग्रुप यह साफ करता है कि अमिताभ झुनझुनवाला ने सितंबर 2019 में यानी करीब सात साल पहले ग्रुप छोड़ दिया था. उसके बाद उनका ग्रुप से कोई संबंध नहीं रहा, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पवार लिमिटेड भी शामिल है. अमित बापना ने दिसंबर 2019 में रिलायंस ग्रुप छोड़ दिया था. उसके बाद उनका ग्रुप से कोई संबंध नही रहा, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर भी शामिल हैं.

इससे पहले इसी महीने सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इसमें आरोप है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को 3750 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. सीबीआई ने एलआईसी की ओर से मिली शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया है.

इसमें साजिश, धोखाधड़ी, पैसों की हेराफेरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं. दर्ज शिकायत में कहा गया है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य, सुरक्षा और परिसंपत्ति कवर के बारे में झूठे दावे किए. इन भ्रामक जानकारियों के आधार पर एलआईसी को 4500 करोड़ रुपए के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर खरीदने के लिए धोखे से प्रेरित किया गया.

सीबीआई के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए धन का दुरुपयोग किया. इस मामले में एलआईसी की शिकायत के बाद एक फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया था. 15 अक्टूबर 2020 को आई बीडीओ इंडिया एलएलपी की ऑडिट रिपोर्ट में कई खुलासे हुए है.

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का कानूनी स्पष्टीकरण: समय पर चार्जशीट दाखिल तो डिफॉल्ट बेल नहीं; सिर्फ कॉपी न मिलना रिहाई का बहाना नहीं

भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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