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संभल जामा मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 3 हफ्ते बाद होगी सुनवाई, सर्वे रिपोर्ट फिलहाल रहेगी सीलबंद

संभल जमा मस्जिद विवाद मामले में दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच ने सुनवाई को टालते हुए कहा कि इस मामले में ऑफिस रिपोर्ट आई है, जिसे अभी तक पढ़ नहीं पाए है.

सुनवाई को टालने की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान मुश्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने सुनवाई को टालने की मांग की. हुजेफा अहमदी ने कहा रमजान का महीना आधा बीत चुका है. इसे उसके बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए. जबकि हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि मैंने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अंतरिम आदेश के खिलाफ है. कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले का निपटारा करेंगे. कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि एक ही आदेश के खिलाफ दो स्व-याचिका कैसे दाखिल की गई? मस्जिद परिसर के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्ति को चुनौती दी गई है.

कानून व्यवस्था को दुरूस्त करने की हिदायत

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा को लेकर दायर याचिका पर निचली अदालत के कार्रवाई पर रोक लगा दिया था. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि सर्वे रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में ही रहेगी, उसे फिलहाल नही खोला जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी हिदायत दी थी. संभल में 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में गठित  आयोग दो माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा. सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद व सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन को आयोग का सदस्य बनाया गया है.

आदेश के बाद संभल में बढ़ा था तनाव

बता दें कि दो दिन के सर्वे करने के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली गई है. कोर्ट ने रिपोर्ट देने के लिए कमिटी को 29 नवंबर तक का समय दिया था. साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत से कहा था कि सर्वेक्षण आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति द्वारा दायर याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में सूचीबद्ध होने तक मामले की सुनवाई न कि जाए. जबकि हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही मस्जिद में हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दाखिल की गई थी.

19 नवंबर 2024 को निचली अदालत द्वारा सर्वेक्षण के आदेश दिए जाने के बाद संभल में तनाव बढ़ गया था. निचली अदालत द्वारा पारित सर्वेक्षण के विरोध करने वाले लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई.

ये भी पढ़ें: भोपाल गैस कांड: यूनियन कार्बाइड के कचरे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दोबारा परीक्षण की मांग खारिज

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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