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भोपाल गैस कांड: यूनियन कार्बाइड के कचरे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दोबारा परीक्षण की मांग खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के दोबारा परीक्षण की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने सावधानी बरती है और भविष्य में रिसाव होने पर अधिकारी इसे और मजबूत कर सकते हैं.

Bhopal Gas Tragedy Supreme Court Verdict on Pithampur Waste Disposal
Edited by Vaibhav Gupta

यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने के बाद दोबारा परीक्षण की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह याचिका भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की ओर से दायर की गई थी.

सारा कचरा कंक्रीट ब्लॉक में बंद

दायर याचिका में कहा गया था कि सारा कचरा कंक्रीट ब्लॉक में बंद करके डंप कर दिया गया है. लेकिन उसे खोलकर दोबारा परीक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में पारा रिसकर आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषित कर सकता है.
इसपर जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ट्रायल इन की रिपोर्ट में सामग्री के रिसाव का कोई प्रमाण नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि अदालत कोई विशेषज्ञ नहीं है. यदि इसपर आपत्ति है तो विशेषज्ञों के सामने यह बात रखनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी प्रकार का रिसाव पाया जाता है, तो अधिकारी संरचना को और मजबूत कर उसे सील कर सकते है.

भविष्य में रिसाव की आशंका?

जस्टिस बागची ने कहा कि सिर्फ यह जांचने के लिए की रिपोर्ट सही है या नही, अदालत क्षेत्र को दोबारा प्रदूषित होने का जोखिम नही उठा सकता है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जब सभी सावधानियां बरती जा चुकी है, 10 दिसंबर2025 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में रिसाव की आशंका से संबंधित कोई ठोस सामग्री हो, तो याचिकाकर्ता हाई कोर्ट का रुख कर सकता है.

इससे पहले इंदौर के रहने वाले चिन्मय मिश्रा ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. पीथमपुर में कचरे के निपटारे के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी. याचिका में रासायनिक कचरे से पीथमपुर के आस पास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य के बारे में चिंता जताई थी.

12 सीलबंद कंटेनर में पैक किया गया कचरा

दायर याचिका में कहा गया था कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को भोपाल से पीथमपुर ले जाने का फैसला लेते समय पीथमपुर के लोगों से सलाह नही ली गई. कुल 12 सीलबंद कंटेनरों में पैक किए कचरे को 2 जनवरी को भोपाल से धार जिले के पीथमपुर ले जाया गया था.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर 2024 को आदेश दिया था कि इस रासायनिक कचरे को वैज्ञानिक विधि से नष्ट किया जाए. मध्य प्रदेश सरकार ने एक जनवरी को यूनियन कार्बाइड से सुरक्षा के बीच कंटेनरों से कचरा पीथमपुर पहुचाया. इसके बाद इसको लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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