दिल्ली हाईकोर्ट (Deli High Court) ने एक मामले में कहा कि किसी अभियुक्त के मामले में जल्द सुनवाई उसका अधिकार है, लेकिन उन मामलों में यह लागू नहीं हो सकता जहां उसके दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है. जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि मुकदमे में देरी खेदजनक है, लेकिन गंभीर व जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों में ज़मानत का यह आधार नहीं हो सकता है.
उन्होंने यह कहते हुए आपसी रंजिश के कारण भाड़े के हत्यारे से अपने ही गांव के एक व्यक्ति की हत्या करवाने के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया और उसकी जमानत याचिका निरस्त कर दी.
भाड़े के हत्यारे ने पीड़िता को बहला-फुसलाकर एक सुनसान जगह पर ले जाकर गोली मार दी थी. अभियुक्त विशन सिंह ने कहा था कि वह वर्ष 2017 से हिरासत में है और मुकदमे की सुनवाई में देरी हो रही है. इस आधार पर उसे जमानत दे दिया जाए.
अदालत ने कहा कि यह मामला जानबूझकर, पूर्व नियोजित और निर्मम हत्या से जुड़ा है. उसे षडय़ंत्र को आगे बढ़ाने के लिए अंजाम दिया गया था. जघन्य अपराधों के आरोपी को रिहा करने से होने वाले सामाजिक प्रभाव का अनदेखी नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी.
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-भारत एक्सप्रेस
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