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जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने पर वित्तीय बोझ का बहाना नहीं बना सकते राज्य- सुप्रीम कोर्ट

निचली अदालतों के जजों की रिटायरमेंट की उम्र को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का विरोध करने के लिए राज्य वित्तीय बोझ का हवाला नही दे सकता है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी.मोहना की बेंच मामले में सुनवाई कर रही है.

अदालत ने कहा कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को.सेवा में बनाए रखने से उन्हें रिटायर करने और खाली हुई जगहों को भरने की तुलना में असल मे कम वित्तीय बोझ पड़ सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि वे न्यायिक अधिकारियों की रिटायमेंट की उम्र बढ़ाने के मामले में फिर.से विचार करें. कोर्ट ने कहा कि जल्द-से जल्द बेहतर होगा कि दो हफ्ते के अंदर कोई स्वतंत्र और व्यवहारिक फैसला लें.

राज्यों से दो हफ्ते में फैसला लेने को कहा

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे अपने संबंधित हाई कोर्ट से सलाह मशविरा कर 2 हफ्तों के भीतर तय करें कि जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई जाए या नही? कोर्ट ने कहा था कि अगर दोनों सहमत होते है, तो न्यायिक अधिकारियों को 1 अप्रैल 2026 से 61 साल की उम्र तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी. जो इस मामले के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा. अदालत ने साफ किया था कि यह बड़ा कानूनी मुद्दा की क्या पूरे देश में जिला अदालतों के अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र एक समान रूप से 60 से बढ़ाकर 62 साल की जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि मामले में मेरिट के आधार पर फैसला लिया जाएगा.

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वर्तमान 60 साल की सेवानिवृत्त आयु के बाद सेवा में बने रहने का लाभ केवल उन्हों राज्यों में उपलब्ध होगा, जहां राज्य सरकार और संबंधित हाई कोर्ट की ओर से आयु बढ़ाने की सिफारिश हो. ऐसी सहमति अथवा सिफारिश के अभाव में न्यायिक अधिकारियों को वर्तमान निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु पूरी होने पर सेवा से सेवानिवृत्त किया जा सकेगा.

मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को बताया था कि राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और जिला स्तर के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 साल है. तथा राज्य सरकार की ओर से इसे बढ़ाने की सिफारिश नही की गई है.

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-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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