Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने संसद सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कराने और संसद परिसर की सुरक्षा के लिए नया कानून बनाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने साफ कहा कि संसद अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह सक्षम है और इस तरह के नीतिगत मामलों में अदालत दखल नहीं दे सकता है.
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि संसद की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना या उसके लिए नया कानून बनाना सरकार और संसद के अधिकार क्षेत्र का विषय है. इसलिए अदालत इसको लेकर कोई दिशा निर्देश जारी नहीं कर सकता. हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आदेश के माध्यम से संसद को अपनी सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. यह फैसला कार्यपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसलिए अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकता है.
सुरक्षा व्यवस्था जैसे नीतिगत फैसलों में न्यायपालिका तभी दखल देती हैं, जब किसी संवैधानिक या कानूनी अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन सामने आए. इस मामले में ऐसा कोई आधार नहीं पाया गया, इसलिए जनहित याचिका को खारिज किया जाता है. दायर याचिका में केंद्र सरकार, लोकसभा व राज्यसभा सचिवालय से मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने की मांग की गई थी, ताकि बदलते सुरक्षा खतरों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.
यह याचिका राज सिंह नामक व्यक्ति की ओर से दायर किया गया था. दायर याचिका में 2001 के संसद हमले और 2023 में लोकसभा में सुरक्षा का उदाहरण देते हुए कहा गया था कि समय की मांग को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए और इसे आधुनिकरण बनाया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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