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थानों में ‘तीसरी आंख’ लगाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; केंद्र ने दिया 2 हफ्ते का भरोसा, अब ‘केरल मॉडल’ पर होगा काम

देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में केंद्रीय सचिव सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि एमिकस क्यूरी के साथ नियमित बैठक कर 2 सप्ताह में सभी मुद्दों का निपटारा कर लिया गया है. केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वे एमिकस आदि के साथ नियमित बैठकें कर सभी मुद्दों का समाधान सुनिश्चित करेंगे.

जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ 28 अप्रैल को मामले में अगली सुनवाई करेगी. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय सचिव को तलब किया था.

राज्य क्यों नहीं कर रहें अनुसरण?

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा था कि अगर आप कहते है कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो दूसरे राज्य उसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते? वहीं, जस्टिस संदीप मेहता ने कहा था कि वे बैठक करके केरल मॉडल के अनुसार विकास क्यों नहीं कर सकते?

इस मामले में पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा था कि इसमें शायद कुछ और राजनीतिक कारण भी है. जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा था कि राज्यों को वैसे भी 40%, 60% देना ही पड़ता है. कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार इसे गंभीरता से ले, उसके बाद कोर्ट इस मामले में आदेश पारित करेगा.

मामले में देरी बर्दाश्त नहीं

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों द्वारा जवाब दाखिल नहीं करने पर वहां के मुख्य सचिव को तलब करने की बात कही थी. कोर्ट ने कहा था कि पुलिस थाने का पूछताछ कक्ष वह स्थान है, जहां सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए. कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा था कि राज्य सरकार ने जो हकफनामा दिया है उसके मुताबिक पूछताछ कक्ष में सीसीटीवी कैमरा नहीं है.

कोर्ट ने ये भी कहा था कि सीसीटीवी कैमरे लगाने में लागत तो आएगी, लेकिन यह मानवाधिकार का सवाल है. पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया था कि अब इस मामले में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इससे पहले इसको लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी देते हुए स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था.

अधिकतर दफ्तरों में समुचित CCTV नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा था कि अब भी देश भर में पुलिस थानों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकतर दफ्तरों में समुचित सीसीटीवी कैमरे नहीं है. जो कैमरे लगे भी है, वो या तो काम नहीं कर रहे है, उसकी गुणवत्ता भी घटिया है. कैमरे की क़्वालिटी इतनी खराब है कि उसकी ऑडियो अच्छी नहीं है. धुंधला दिखता है.

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में मुख्य सचिव ने मांगी माफी, कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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