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पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में मुख्य सचिव ने मांगी माफी, कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में राज्य सरकार और पुलिस की नाकामी पर कड़ा रुख अपनाया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यदि स्टेट मशीनरी असफल होती है तो कोर्ट कार्रवाई करेगी.

CJI Suryakant initiatives

पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल सरकार को आड़े हाथ लिया है. सीजेआई ने कहा कि अगर स्टेट मशीनरी नाकाम हो जाती है तो हम देखेंगे कि क्या करना है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ मामले में 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी.

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आपकी और पुलिस की नाकामी की वजह से यह काम न्यायिक अधिकारियों को देना पड़ा. पश्चिम बंगाल की नौकरशाही की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे है. कृप्या राज्य की छवि सुधारने में मदद कीजिए, हमें मजबूर मत कीजिए. सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के अन्तर्गर्त मिले शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मामले को स्थानीय पुलिस से एनआईए को ट्रांसफर करने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने मामले में दर्ज एफआईआर से संबंधित दस्तवेज़ों को एनआईए को सौपनें का आदेश दिया है. न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में अपनी पहली रिपोर्ट कोर्ट को सौप दी गई है.

जांच में निष्पक्षता और गंभीरता जरूरी- सुप्रीम कोर्ट

इस मामले की सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि अभी तक कुल 12 एफआईआर दर्ज किया गया है और 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सीजेआई ने कहा कि आयोग द्वारा हमें सूचित किया गया है कि न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की जांच का जिम्मा एनआईए को सौप दी गई है. एनआईए ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा है, जिसमें राज्य के खिलाफ गंभीर आरोप है. सीजेआई ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि जांच के दौरान यदि पाया गया है और अपराध किए गए है, अपराध की साजिश में लोग शामिल है तो एनआईए अन्य एफआईआर दर्ज करेगी.

कोर्ट ने यह भी कहा कि एनआईए मामले की जांच कर रिपोर्ट कोलकाता के स्थानीय अदालत को सौंपेगी. तब तक एनआईए समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी. कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित हैं. हमें आशा है कि अधिकारियों ने अब उस जिम्मेदारी को भलीभांति समझ लिया है, जिसके तहत न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की स्थिति में उनसे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सहायता प्रदान करने की अपेक्षा की गई थी.उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नही करते है.

मुख्य सचिव की सुरक्षा पर कोर्ट ने उठाया सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए मुख्य सचिव से कहा किउनकी सुरक्षा इतनी ज्यादा है कि कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक उनसे संपर्क नही कर पा रहे हैं. उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि अपनी सुरक्षा थोड़ी कम कीजिए. ताकि कम से कम जरूरी कॉल तो आप तक पहुच सकें. मुख्य न्यायाधीश ने.सफाई देते हुए कहा कि उन्हें हाई कोर्ट के अधिकारियों की कोई कॉल नही मिली और वे उस.समय दिल्ली में मीटिंग के लिए आए हुए थे. उन्होंने यह भी बताया कि दोपहर 2 से 4 बजे के बीच वे फ्लाइट में थे. इसपर कोर्ट ने कहा कि अगर उन्होंने अपना.मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी साझा की होती, तो संपर्क करना आसान होता.

सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह का रवैया प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है और यह केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी नौकरशाही के जिद्दी रवैये की समस्या सामने आ रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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