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दिव्यांगों को लेकर टिप्पणी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत सभी कमेडियन्स को माफी मांगने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर कमेडियनों द्वारा की गई टिप्पणी के मामले में सभी को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि केवल सार्वजनिक मंच पर ही माफी मांगना पर्याप्त नहीं है. बल्कि सोशल मीडिया पर सभी माफी मांगे.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ पर यह आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिशा निर्देश जारी करने के लिए समय दे दिया है. कोर्ट नवंबर में.इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा कि हास्य या मनोरंजन के नाम पर किसी की भावनाओं का अपमान नही किया जा सकता है.

सोनाली ठक्कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में हुए पेश

सुनवाई के दौरान समय रैना, निशांत, विपुल गोयल, और बलराज मलिक कोर्ट में मौजूद थे, वही सोनाली ठक्कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए. पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने कहा था कि उनके खिलाफ कोई सीधी याचिका दाखिल नही की गई है, तो कोर्ट ने साफ कहा था कि कोर्ट के समन को हल्के में नहीं लिया जा सकता, अगर-मगर की कोई जगह नहीं है.

मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल वेंक्टरमणी ने कोर्ट को बताया कि दिशा निर्देश आने में अभी थोड़ा समय लगेगा. कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया पर विकलांगों, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों का अपमान करने या उनका उपहास करने वाले भाषणों पर अंकुश लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी करने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि यह दिशा निर्देश व्यापक होना चाहिए, हम इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की राय भी लेना चाहते हैं. इसपर याचिकाकर्ता के वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि माननीय जजों ने एक कड़ा संदेश दिया है और घर-घर तक पहुच गया है. उन्होंने माफी मांग ली है.

माफी मांगना एक बात

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि माफी मांगना एक बात है, लेकिन क्या यह जरूरी है कि किसी फाउंडेशन को हर बार इसके बाद अदालत आना पड़े? अगर किसी व्यक्ति को प्रताड़ित किया जाए तो क्या होगा? जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हास्य को एक अच्छी तरह से लिया जाता है और यह जीवन का एक अभिन्न अंग है, हम खुद पर हंसते हैं, लेकिन जब हम दूसरों पर हंसने लगते हैं और संवेदनशीलता को ठेस पहुचाते है.

कोर्ट ने कहा कि जब सामुदायिक स्तर पर जब हास्य उत्पन्न होता है, तो यह समस्या बन जाता है, और यही बात आज के तथाकथित प्रभावशाली लोगों को ध्यान में रखनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि वे भाषण का व्यवसायीकरण कर रहे है. कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी खास वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुचाने के लिए समुदाय का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जब तक आपको उस नुकसान के अनुपात में परिणाम न भुगतने पड़े जो आप चाहते हैं.

ये भी पढ़ें:न्यायिक अधिकारियों के माता-पिता की तरह काम करना चाहिए- सीजेआई बी. आर गवई

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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