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न्यायिक अधिकारियों के माता-पिता की तरह काम करना चाहिए- सीजेआई बी. आर गवई

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि सिंगल पैरेंट महिला एडीजे को हजारीबाग में रहने की अनुमति दी जाए. महिला जज ने बेटे की पढ़ाई और चाइल्ड केयर लीव को लेकर अर्जी दायर की थी.

CJI B. R. Gavai

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झारखंड की एक महिला एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एडीजे) की ओर से दायर नई अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि सिंगल पैरेंट महिला जज को हजारीबाग में रहने की अनुमति देने का निर्देश दिया है. जज के बेटे की आगामी 12 वीं कक्षा की परीक्षा को ध्यान रखते हुए बोकारो स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है. सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह आदेश दिया है.

हाई कोर्ट ने चाइल्ड केयर लीव दिया

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक अधिकारियों के माता-पिता की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाइकोर्ट्स को अपने न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं के प्रति सजग रहना होगा. महिला न्यायिक अधिकारी ने छह महीने की चाइल्ड केयर छुट्टी के अनुरोध को झारखंड हाई कोर्ट के अस्वीकार करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की है. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि महिला जज को झारखंड हाई कोर्ट ने सिर्फ 92 दिन की छुट्टी दी है. जबकि उन्होंने 194 दिन की छुट्टी की मांग की थी. वही झारखंड हाई कोर्ट की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि अगर 8 महीने की सीसीएल दी जाती है, तो इससे गलत परंपरा की शुरुआत होगी और अदालत के कामकाज प्रभावित होगा.

महिला जज ने 4000 से अधिक मामलों का निपटारा किया

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट से महिला जज की याचिका पर दोबारा विचार करने को कहा था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हाई कोर्ट को पिछले फैसले के प्रभाव में आए बिना महिला जज की याचिका पर पुनर्विचार करें. एकल अभिभावक महिला न्यायिक अधिकारी ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह अर्जी दायर की है. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि वह एकल अभिभावक समाज के सबसे निचले तबके से आती है, वह अनुसूचित जाति से है. उन्होंने 4000 से अधिक मामलों का निपटारा किया है.

याचिका में कहा गया है कि चाइल्ड केयर लिव के नियम के अनुसार, न्यायिक अधिकारी को पूरी सेवा अवधि में कुल 730 दिनों की छुट्टी का अधिकार है, लेकिन उन्होंने केवल छह महीने की छुट्टी ही मांगी थी. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को यह भी बताया था कि संबंधित जज एकल माता हैं और वर्तमान में झारखंड हाई कोर्ट के अधीन कार्यरत हैं.


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भारत एक्सप्रेस



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