एक निजी कंपनी से 6 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी करने के आरोपी दंपत्ति को निचली अदालत द्वारा जमानत देने के तरीके की सुप्रीम कोर्ट ने आलोचना की है. कोर्ट ने पुलिस की ओर से गंभीर चूकों को देखते हुए जांच अधिकारी के आचरण की जांच का आदेश दिया है. कोर्ट दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अधिकारी की भूमिका की व्यक्तिगत जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा है कि जमानत की एक कार्यवाही में जांच अधिकारी का रुख संदेह पैदा करता है. वही हाई कोर्ट ने एक कमेटी बनाने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि दिल्ली न्यायिक सेवा के दो न्यायिक अधिकारियों को बाध्यकारी निर्णयों का उल्लंघन करते हुए दो आरोपियों को जमानत देने के अवैध और गलत तरीके के लिए कम से कम सात दिनों की अवधि के लिए विशेष न्यायिक प्रशिक्षण लेना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा दोनों आरोपियों को दिए गए अग्रिम जमानत को रद्द करते हुए यह निर्देश दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्यायिक अधिकारियों को कार्यवाही कैसे संचालित करनी है और हाई कोर्ट के फैसलों का सम्मान कैसे करना है. इस बारे में संवेदनशील बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यवस्था करने का अनुरोध किया है.
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस. वी. एन भट्टी की पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के दृष्टिकोण अस्थिर और विकृत है. कोर्ट ने कहा कि अभियुक्तों ने चार साल की अंतरिम सुरक्षा का लाभ उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट को गुमराह किया और बाद में नियमित जमानत की मांग करते हुए अपनी अग्रिम जमानत याचिकाओं की अस्वीकृति को छुपाया है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट धोखाधडी के मामले में आरोपित निखिल जैन को राहत देने से इनकार कर दिया था. लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-चार (उत्तर) और एडिशनल सत्र न्यायाधीश-चार ने निखिल जैन की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है. जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों न्यायाधीशों के खिलाफ जांच का आदेश दिया है.
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस गिरीश कथपालिया ने अपने आदेश में कहा है कि रोहिणी कोर्ट में तैनात दोनों जजों ने न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन किया है. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष और जांच टीम में भी खामियां पाई और कहा कि उनकी भी जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने अपने फैसले में जरूरी कार्रवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेजने का आदेश दिया. उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व जज का कहना है कि दोनों न्यायिक अधिकारियों को जो ट्रेनिंग लेने के लिए कहा गया है, वह एफिशिएंसी अप्रूव करने के लिए कहा गया है और ये अच्छी चीज है अप्रूव होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट ने इसके अंदर क्या ऑब्जॉर्ब किया है यह देखना होगा. अगर किसी तरीके के दबाव है तो इसको सुप्रीम कोर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए.
उन्होंने कहा कि दोनों जजों के खिलाफ जांच होनी चाहिए. जांच के लिए इन हाउस कमेटी का गठन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का एक विजिलेंस डिपार्टमेंट है जो इस तरह की मामले की जांच करती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई इन जजों के खिलाफ शिकायत नही करता है तो हाई कोर्ट स्वतः संज्ञान भी ले सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट या सेंशन जज के खिलाफ जो कार्यवाही होती है उसमें कॉलेजियम का कोई रोल नही होता है.
वही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव रोहित पांडेय ने कहा कि धोखाधड़ी के इस मामले में निचली अदालत ने कार्रवाई नही करने की बात की यह सही नही है. उन्होंने कहा कि सभी हाई कोर्ट में एक विजलेंस विभाग होता है. अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है कि जांच के लिए विजलेंस विभाग को भेजा जाता है. इन्होंने कहा कि जांच अधिकारी सहित जितने लोग शामिल होंगे उनके खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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