देशभर में लापता बच्चों के मामले पर Supreme Court ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि 1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2025 तक देश में लापता बच्चों के मामलों से संबंधित आकंड़े एकत्र करने का निर्देश दिया है. आकंड़े एकत्र करने के दो सप्ताह के भीतर नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया है.
Supreme Court ने इसके लिए सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है. इससे पहले दाखिल रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में हर 8 मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है. कोर्ट ने कहा था कि यह मुद्दा गंभीर है. 14 अक्टूबर को कोर्ट ने सभी राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों को लापता बच्चों के मामलों को देखने के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक कॉमन ऑनलाइन पोर्टल बनाने को कहा था. जिस पोर्टल पर सभी राज्यों से जुड़ीं जानकारी अपलोड किया जा सकें और हर बार अगर कोई बच्चा लापता हो, तो उसपर अलर्ट जारी हो.
कोर्ट ने कहा था कि बच्चों की तस्करी और अपहरण एक राज्य की सीमा तक सीमित नहीं है. संगठित नेटवर्क बच्चों को एक राज्य से उठाकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं. ऐसे में राज्यों के बीच सूचनाओं का रियल समय पर आदान-प्रदान जरूरी है. कोर्ट ने कहा था कि अक्सर एक राज्य से गायब बच्चा दूसरे राज्य में ले जाया जाता है, इसलिए समन्वित प्रयास बेहद जरूरी है.
दायर याचिका में कहा गया है कि संगठित तस्करी गिरोह गरीब और कमजोर परिवारों के बच्चों का अपहरण कर उन्हें बेच देते है. बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने 24 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि जिला जिला स्तर और सलाना स्तर पर डेटा इकठ्ठा किया जाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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