सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली में किए जा रहे सुधार व बदलावों से संबंधित रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 9 अक्टूबर को होगी.
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें एनटीए की कार्यप्रणाली में किए जा रहे बदलावों और सुरक्षा से जुड़े ठोस कदमों का ब्योरा दिया गया है:
विशेषज्ञ टीमों का गठन: सरकार के मुताबिक, एनटीए अब परीक्षा के हिसाब से बनाई जाने वाली पारंपरिक यूनिट्स के बजाय विभिन्न कार्यों के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित ‘विशेषज्ञ टीमों’ (Expert Teams) की व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा से जुड़े अलग-अलग कार्यों के लिए गहरी विशेषज्ञता रखने वाले लोगों का दल तैयार करना है.
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती: एनटीए के महानिदेशक (DG) के पद पर सचिव स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया गया है. इसके अलावा, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) समेत अन्य विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं के अनुभवी अधिकारियों को भी एनटीए में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. साथ ही, सुरक्षा, मानव संसाधन (HR) और शोध (Research) जैसे क्षेत्रों के लिए बाहरी विशेषज्ञों की भर्ती भी की जा रही है.
गोपनीय कार्यों के लिए सुरक्षित परिसर: सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि परीक्षाओं से जुड़े सभी गोपनीय कार्यों को नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित लगभग 55,524 वर्ग फुट के एक सुरक्षित सरकारी परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया है. इस परिसर की सुरक्षा और निगरानी के लिए 39 केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान, एक्स-रे जांच मशीनें, मेटल डिटेक्टर्स और आवाजाही पर कड़ी नजर रखने जैसी उच्चस्तरीय व्यवस्थाएं की गई हैं.
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रिपोर्ट सार्वजनिक करने के निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को सख्त निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा दाखिल किए गए इस विस्तृत हलफनामे को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए, ताकि इससे जुड़े सभी छात्र, शिक्षक और अन्य हितधारक अब तक किए गए सभी बदलावों की जानकारी आसानी से देख सकें.
टास्क फोर्स की प्रगति रिपोर्ट: अदालत ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के संयुक्त सचिव को एक उच्च अधिकार प्राप्त कार्य बल (High Powered Task Force) के कामकाज और उसकी प्रगति पर नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसके लिए अदालत ने दो सप्ताह का समय दिया है.
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