सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट और बैंकिंग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि फ्लैट की डिलीवरी न मिलने पर खरीदार को रिफंड के तौर पर केवल वही रकम पाने का अधिकार है, जो उसने अपनी जेब से खर्च की है. इसके साथ ही, कोर्ट ने निर्माण की प्रगति का उचित सत्यापन किए बिना लोन की किस्तें जारी करने पर एचडीएफसी बैंक पर सेवा में कमी (Deficiency in Service) के लिए लगाए गए 2 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा है. यह फैसला न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने हैदराबाद के ‘लोढ़ा बेलेजा प्रोजेक्ट’ से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया.
कोर्ट ने कहा कि खरीदार मधु कुदापा को बिल्डर और बैंक को किए गए अपने कुल 1.27 करोड़ रुपये के भुगतान पर रिफंड और ब्याज पाने का अधिकार है. हालांकि, पूरी बिक्री कीमत लौटने का आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उसमें बैंक से लिया गया वह लोन भी शामिल है जिसकी देनदारी अभी विवादित है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब होम लोन बकाया है और बैंक का रिकवरी दावा विचाराधीन है, तब खरीदार को पूरी बिक्री कीमत लौटाना अनुचित लाभ (Unjust Enrichment) देने जैसा होगा. बिल्डर को बैंक की ओर से जारी की गई लोन राशि को खरीदार की अपनी रकम नहीं माना जा सकता.
अदालत ने बिक्री समझौते के क्लॉज 24 के आधार पर खरीदार को प्रत्येक भुगतान की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान तक 12 फीसदी सालाना साधारण ब्याज देने का निर्देश दिया है. हालांकि, खरीदार द्वारा मांगे गए 18 फीसदी ब्याज को कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि बिल्डर की ओर से देरी पर वसूले जाने वाले ब्याज की दर को खरीदार के पक्ष में स्वतः लागू नहीं किया जा सकता.
फ्लैट न मिलने, लंबे समय तक अनिश्चितता झेलने और अपनी रकम से वंचित रहने की स्थिति को देखते हुए पीठ ने बिल्डर के खिलाफ किराए, मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च सहित सभी दावों के पूर्ण और अंतिम निपटारे के लिए 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में रिफंड पर ब्याज के साथ अलग से किराए के संबंध में बढ़ाई गई मांग कोर्ट में पहली बार उठाई गई थी और उसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे.
खरीदार मधु कुदापा ने वर्ष 2009 में हैदराबाद के लोढ़ा बेलेजा प्रोजेक्ट में एक फ्लैट बुक किया था. उन्होंने अपनी ओर से 5.11 लाख रुपये का भुगतान किया था, जबकि एचडीएफसी बैंक ने त्रिपक्षीय समझौते (Tripartite Agreement) के तहत बिल्डर को सीधे 1.68 करोड़ रुपये का लोन जारी किया था.
ये भी पढ़े: ताहिर हुसैन की बढ़ेंगी मुश्किलें! दंगा भड़काने के मामले में कोर्ट ने सुनाई 2 साल की कैद और जुर्माना
बिल्डर को बिक्री मूल्य का लगभग 95 फीसदी हिस्सा मिलने के बावजूद तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया. इसके बाद खरीदार ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में शिकायत दर्ज कर रिफंड, ब्याज, किराए की भरपाई और मुआवजे की मांग की थी. बैंक को किए गए भुगतानों सहित उनकी अपनी जेब से खर्च की गई कुल रकम 1.27 करोड़ रुपये थी.
Meerut Fake Silver Foil Factory: मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र के काशी गांव में खाद्य…
21 नवंबर को PM मोदी का बिहार दौरा. वैशाली में 1265 एकड़ के औद्योगिक पार्क…
केंद्र सरकार ने ECMS के तहत 12 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी. ₹7,500 करोड़ से…
Rice stock monitoring Food Stock Portal OMSS target Bharat Rice: चावल की कीमतों को काबू…
देहरादून में गृह मंत्री अमित शाह ने ₹1,475 करोड़ की 62 योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया.…
Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में दीपोत्सव के 10वें संस्करण को भव्य बनाने की तैयारियां पूरी…