लीगल

‘सरकारी अफसर के इशारे पर नहीं चलेगा वक्फ बोर्ड…’ सुप्रीम कोर्ट ने पलटा केरल हाई कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उस निर्देश को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि राज्य वक्फ बोर्ड (Waqf Board) सरकार के संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव की देखरेख में काम करेगा. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि मामले को वापस केरल हाई कोर्ट भेज दिया है. कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट से मामले में जल्द सुनवाई कर फैसला देने को कहा है.

मेरिट के आधार पर नहीं है फैसला

कोर्ट ने कहा कि यह मामला हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा कि वह पार्टियों को अपने दावे और जवाबी दावे दाखिल करने का पूरा मौका दें. कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि उसने मामले के मेरिट के आधार पर कोई फैसला नहीं दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है. बोर्ड ने उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनुपस्थिति में किसी भी बड़े नीतिगत फैसले लेने से रोक दिया गया था.

दलील सुने बिना आदेश पारित न करें

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शॉन जॉर्ज ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विरोध किया था. उन्होंने दायर याचिका में कहा था कि वक्फ बोर्ड के सदस्यों द्वारा दायर याचिका पर उनकी दलील सुने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न करें.

सुप्रीम कोर्ट ने पैरा 6 के तहत बोर्ड को कोई भी पूंजीगत खर्च आदि करने का निर्देश दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से सहमत है कि आदेश के पैरा 6 की अंतिम लाइन को रखने की कोई आवश्यकता नहीं है.

इसलिए यह निर्देश कि बोर्ड सरकार के संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव की निगरानी में काम करेगा, इसे हटाया जाता है. संयुक्त सचिव, जो बोर्ड के सदस्य हैं, उसी हैसियत से अपना कार्य जारी रखेंगे.

केरल हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

केरल हाई कोर्ट ने 15 जुलाई को अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्य वक्फ बोर्ड को अदालत की अनुमति के बिना कोई बड़ा फैसला लेने से रोक दिया था. अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि बोर्ड बिना न्यायालय की स्पष्ट अनुमति के कोई पूंजीगत खर्च या नीतिगत फैसला नहीं करेगा.

केरल हाई कोर्ट में सेवानिवृत्त जूनियर वारंट अधिकारी स्टालिन वी. एम सहित अन्य ने दायर किया है. उनका कहना है कि राज्य सरकार ने 2 फरवरी 2026 के आदेश के जरिए वक्फ बोर्ड के 11 में से 9 सदस्यों की नियुक्ति की, लेकिन यह संशोधित वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है.

दायर याचिका में कहा गया है कि कानून के अनुसार बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों के साथ-साथ शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी और अन्य पिछड़े मुस्लिम वर्गों का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें: ‘दिल्ली में क्या होगा, वो दिल्ली पुलिस देखेगी!’ NEET-UG प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने पर नैनीताल हाई कोर्ट ने उत्तराखंड पुलिस को लगाई फटकार

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

भोपाल में बीजेपी का बड़ा शक्ति प्रदर्शन आज: राजनाथ का दौरा रद्द, अब जेपी नड्डा संभालेंगे मोर्चा

Madhya Pradesh Politics: भोपाल में आज होने वाली बीजेपी की पदयात्रा में राजनाथ सिंह की…

53 seconds ago

सेर्वोटेक रिन्यूएबल का भौकाल.. ! मुनाफे में 2366% की  छलांग, EV और सोलर सेक्टर में मचाया तहलका

सेर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम लिमिटेड ने Q2 FY27 में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए कंसोलिडेटेड…

3 minutes ago

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से क्या बदलेगी भारतीयों की किस्मत? H-1B और ग्रीन कार्ड पर टकटकी

US Election Impact: अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के परिणामों का असर H-1B वीजा, ग्रीन कार्ड के…

28 minutes ago

दिवाली पर घर में लगा लें ये 5 पौधे, सुख-समृद्धि के साथ आएगी मां लक्ष्मी की कृपा!

Diwali Lucky Plants for Home: दिवाली पर तुलसी, मनी प्लांट, शमी, क्रासुला और केले का…

29 minutes ago

अमेरिका में बजा भारत का डंका! पिया डंडिया की धमाकेदार जीत से विरोधियों के खेमे में मचा कोहराम

US Midterm Elections 2026: भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट पिया डंडिया ने फ्लोरिडा हाउस रेस में जीत हासिल…

47 minutes ago

‘आत्मज्ञान से मनुष्य को आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास मिलता है’, प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया सुभाषित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा…

1 hour ago